अफगानिस्तान के बहाने पूरे होंगे चीन के नापाक मंसूबे! दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका

समझौते के बाद से ही खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस का अफगानिस्तान में दखल बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि आईएसआईएस का मध्य एशिया के बाद दूसरा लक्ष्य दक्षिण एशिया के देश हैं। भारत सरकार को आने वाले इस महासंकट से सावधान रहना होगा क्योंकि तालिबान और पाकिस्तान की मिलीभगत से हुए कंधार विमान अपहरण का दंश हम झेल चुके हैं।

अच्छे नहीं चल रहें ‘दबंग’ के दिन, कोरोना से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका की मात

समझौते की दूसरी शर्त के मुताबिक तालिबान को आतंक के रास्ते से हटना था, लेकिन दोनों पक्षों में बातचीत के चौबीस घंटे बीतने से लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं।

तेल की कम खपत और अधिक उत्पादन से मुश्किल में ओपेक

भारत जैसा तेल आयातक (Importer) देश कुल खपत (consumption) का 82 परसेंट तेल आयात करता है, जिसमें से 28 परसेंट क्रूड ऑयल (Crude Oil) होते हैं। क्रूड आयल को आम भाषा में कच्चा तेल कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम पेट्रोलियम और कच्चे तेल को जिसमें मापते हैं, उसे बैरल (Barrel) कहते हैं।

अरब मुल्क: खूनखराबे में लाखों खाक, नहीं रुक रही आपसी जंग

भारत को जीत कर तुर्कों ने बाबर के सामने यह शर्त रखी थी कि वह उसे मुस्लिम देश बना देगा। इन अरब देशों में आपसी युद्ध की एक प्रमुख वजह यह है कि जिन हालातों में इन इस्लामिक देशों का विकास हुआ था, कुछ लोग अब भी उन्ही हालातों को बनाए रखना चाहते हैं।

Corona से निपटने में SAARC निभा सकता है बड़ी भूमिका

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सार्क देशों ने COVID-19 को लेकर रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक मीटिंग की।