जानकारी: रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर; जानें क्या हैं इनके मायने

वत्सल श्रीवास्तव

कोरोना संकट को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर (Governor) शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को कुछ बड़े ऐलान किए। आरबीआई ने रेपो रेट में 75 बेसिस प्वाइंट की कटौती की, जिसके बाद अब यह 5.15 से घटकर 4.45 फीसदी हो गया। रिवर्स रेपो रेट में भी 90 बेसिस प्वाइंट की कटौती की। इससे यह अब 4 फीसदी हो गया। इसके अलावा सीआरआर में 100 प्वाइंट की कटौती की। यह अब 3 फ़ीसदी कर दिया गया।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि जो भी कदम उठाए गए हैं, उनसे देश के बैंकिंग सिस्टम में कुल 3.74 लाख करोड़ रुपए आएंगे। इस ऐलान के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया और आरबीआई की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इससे मध्यम वर्ग के परिवारों और कारोबारियों को काफी फायदा मिलेगा।आरबीआई के ऐलान में तीन प्रमुख शब्द- रेपो रेट (Repo Rate), रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) और सीआरआर (CRR) शामिल हैं। आइए पहले इन तीनों का मतलब समझते हैं। 

रेपो रेट (Repo Rate)- इसे हम रिपरचेस रेट भी कहते हैं। अपने रोजमर्रा की जिंदगी में जब भी हमें पैसों की जरूरत पड़ती है, तो हम बैंकों से उधार लेते हैं। इसी तरह बैंकों को भी अपने रोजमर्रा के कामकाज में कर्ज लेने पड़ते हैं, जिसे वह सबसे बड़े बैंक यानी आरबीआई (RBI) से लेता है। बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक (Reserve Bank) को जिस दर से ब्याज चुकाता है, उसे रेपो रेट (Repo Rate) कहते हैं।

जब रेपो रेट कम होगा तो बैंक को रिजर्व बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा। इससे बैंक कम ब्याज पर अपने ग्राहकों को लोन दे सकेंगे। अगर रिजर्व बैंक रेपो रेट को बढ़ा देता है तो बैंकों को पैसे जुटाने में अधिक रकम खर्च करनी होगी और वे अपने ग्राहकों को भी अधिक ब्याज दर पर कर्ज देंगे। 

रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate)- दिनभर काम के बाद बैंकों के पास जो पैसे बच जाते हैं, उन्हें वह आरबीआई (RBI) के पास जमा कर देते हैं। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। भारतीय रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से बैंकों को ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट (Reverse Repo Rate) कहते हैं।

जब देश में नकदी बढ़ जाती है तो आरबीआई रिवर्स रेपो रेट को बढ़ा देता है, जिससे महंगाई की स्थिति न पैदा हो। बैंक अपने पैसे आरबीआई के पास जमा कर देते हैं, ताकि बाजार में बांटने के लिए कम रकम रह जाए।

कैश रिजर्व रेशियो (CRR)- आरबीआई ने अपने कुछ नियम बनाए हैं। हर बैंक को अपने कैश रिजर्व का कुछ हिस्सा आरबीआई के पास जमा करना पड़ता है। इसे सीआरआर (CRR) कहते हैं। आरबीआई (RBI) ने ये नियम इसलिए बनाए हैं, जिससे किसी भी बैंक में बहुत बड़ी मात्रा में ग्राहकों को रकम निकालने की जरूरत पड़े तो बैंक उसे पैसे देने से मना न कर सकें।

अगर सीआरआर बढ़ता है तो बैंकों को आरबीआई के पास अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा रखना पड़ता है। इससे बैंकों के पास पैसे कम हो जाते हैं। अगर सीआरआर घटता है तो बाजार में नकदी का प्रवाह बहुत तेजी से बढ़ जाता है।

दरअसल आरबीआई ने कोरोना वायरस के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर में परिवर्तन किया है। इसका असर निश्चित रूप से बाजार पर पड़ेगा।

2 thoughts on “जानकारी: रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर; जानें क्या हैं इनके मायने

  1. वत्सल जी ने बहुत ही अच्छे प्रकार से आरबीआई के कदमों के वर्णन अपने लेख में किया है।
    बहुत बहुत धन्यवाद

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