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Plasma Therapy: Covid-19 को मात देकर निकले लोगों का Blood बना पारस पत्थर

Photo Source: The Economic Times

दिल्ली में अप्रैल के पहले हफ्ते में एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। धीरे-धीरे उसकी तबीयत बिगड़ती गई। उसको निमोनिया हो गया था। अंत में उसका इलाज प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) के जरिए किया गया। अब उसकी तबीयत ठीक बताई जा रही है। उसे अस्पताल में ही रखा गया है। आखिर यह प्लाज्मा थेरेपी क्या है? इसको लेकर अलग-अलग राज्यों के 30 से अधिक अस्पतालों ने इस विधि से इलाज करने की इजाजत मांगी है।

Covid-19 के खतरे से जो रोगी स्वस्थ होकर आ रहे हैं, उनके शरीर में जिस एंटीबॉडीज (Antibodies) का इस्तेमाल किया जाता है, वह धीरे धीरे विकसित हो जाता है। उन व्यक्तियों के एंटीबॉडीज (Antibodies) को लेकर ही बीमार व्यक्तियों का इलाज किया जाता है। जिनका एंटीबॉडीज इस्तेमाल किया जाएगा, उन्हें डोनर (Donor) कहेंगे। डोनर का एंटीबॉडी उसके स्वस्थ होने के 2 हफ्ते बाद ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ यह भी जरूरी है कि उसका कम से कम दो बार कोविड-19 (Covid-19) का टेस्ट कराया गया हो।

वह व्यक्ति किसी दवाई का सेवन ना किया हो। इसके बाद डोनर के शरीर की दोबारा जांच की जाती है तथा दोबारा कोरोना की भी जांच की जाती है। डोनर की जांच में ही 7 से 8 घंटे लग जाते हैं। फिर उन डोनर के खून से प्लाज्मा (Plasma) को निकाला जाता है। प्लाज्मा को निकालने में तकरीबन डेढ़ से 2 घंटे लगते हैं। यह काम काफी सतर्कता और वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में ही किया जाता है। डोनर के शरीर से ऐस्पेरेसिस तकनीक (Apheresis technology) से खून निकाला जाता है, जिसमें खून से प्लाज्मा या प्लेटलेट्स (Plasma or platelets) को निकालकर बाकी खून को फिर से उसके शरीर में वापस डाल दिया जाता है।

डोनर के शरीर से हम 400 मिलीलीटर प्लाज्मा ही केवल निकाल सकते हैं । जिस व्यक्ति के शरीर में प्लाज्मा को दिया जाता है वह केवल 200 मिलीलीटर ही होता है। यानी एक डोनर के द्वारा दो व्यक्तियों को प्लाज्मा दिया जा सकता है। प्लाज्मा थेरेपी विधि कोविड-19 के इलाज के लिए डॉक्टरों द्वारा एक उपयुक्त विधि बताई जा रही है। क्योंकि अभी तक कोरोनावायरस (Coronavirus) की वैक्सीन (Vaccine) नहीं बनाई जा सकी है। ऐसे में जो व्यक्ति कोरोनावायरस के संक्रमण से सही होकर वापस आए हैं, उनके प्लाज्मा को लेकर अन्य व्यक्तियों का इलाज किया जा सकता है।

प्लाज्मा थेरेपी विधि डॉक्टरों की एक जांची-परखी विधि है। क्योंकि इस विधि में जो भी व्यक्ति डोनर बनेगा, उसकी भी पहले जांच-परख की जाएगी। तब जाकर वह कहीं प्लाज्मा को डोनेट कर पाएगा। प्लाज्मा थेरेपी विधि अभी काफी कारगर साबित हो सकती है। ऐसे में जो व्यक्ति कोरोना के संक्रमण से सही होकर वापस आ चुके हैं, उनको इसमें पूर्ण रूप से सहयोग करना चाहिए।

देश का पहला मरीज जिसका प्लाज्मा थेरेपी से इलाज किया गया, वह अब पूरी तरह से ठीक हो गया है। उसे हाल ही में राजधानी के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था।v

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