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Republic Day 2026 Environment: देश के लिए लें हरा संकल्प, प्रकृति बचाएं

Republic Day 2026 Environment: आओ एक संकल्प लें, देश को हरा-भरा बनाएं। (Image Source: Meta AI)

Republic Day 2026 Environment: 26 जनवरी हमारे देश के लिए गौरवशाली ऐतिहासिक दिन है, जब भारत ने आज़ादी के लगभग 2 साल 11 महीने 18 दिनों के बाद इसी दिन संसद में अपना संविधान पास किया। इस दिन भारत को संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया और तभी से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

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Republic Day 2026 Environment: पर्यावरण रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य

भारत का गणतंत्र दिवस केवल संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह अवसर है जब हम पर्यावरण के प्रति अपने कर्त्तव्य को भी याद कर सकते हैं। कर्त्तव्यपालन की सतत जागरुकता से ही हम अपने अधिकारों का सुरक्षित और सार्थक प्रयोग कर सकते हैं। स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है, लेकिन यह अधिकार तब तक अधूरा है जब तक हम देश और पृथ्वी के सामने मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान नहीं करते। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान में वृद्धि ने पृथ्वी पर संकट मंडराना शुरू कर दिया है।

पर्यावरण हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। इसकी रक्षा में लापरवाही करना, अपने ही अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करना है। भूमि, वायु और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों का बुद्धिमत्तापूर्ण प्रयोग ही वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ जीवन सुनिश्चित कर सकता है।

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Republic Day 2026 Environment: नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी

आमतौर पर हम केवल सरकार से अपेक्षा रखते हैं, लेकिन व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं निभाते। हालांकि सरकार ने कई पहल की हैं—जैसे पर्यावरण अदालत, पर्यावरण हितैषी उत्पाद, हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध, राष्ट्रीय कूड़ा परिषद, सौर ऊर्जा आयोग और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध—लेकिन असली बदलाव नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से आता है।

हमारा संविधान अनुच्छेद 48A और 51 क (ग) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को नागरिक का मौलिक कर्तव्य बनाता है, जो हमें वनों, नदियों, झीलों और वन्य जीवों की रक्षा का दायित्व सौंपता है। इस हरे संकल्प को अपनाते हुए गणतंत्र दिवस पर हर नागरिक पेड़ लगाने, प्लास्टिक का त्याग करने, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा बचत के उपाय अपनाने का प्रण ले सकता है। स्वच्छता अभियान में योगदान देना, कचरा अलग करना और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना राष्ट्र निर्माण का असली स्वरूप है।

गणतंत्र की सार्थकता तभी होगी जब हर व्यक्ति को काम, भोजन और स्वच्छ पर्यावरण मिले। जब हम नदियों को स्वच्छ रखने, वनों की कटाई रोकने और जैविक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लेते हैं, तो हम न केवल अपना भविष्य सुरक्षित करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध हवा और जल का उपहार भी देते हैं। यह हरा संकल्प व्यक्तिगत प्रयासों से सामूहिक बदलाव लाता है और गणतंत्र को मजबूत बनाता है।

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जब हम पर्यावरण की रक्षा करने और अपने आसपास के लोगों को इस बारे में जागरूक करने की पहल करते हैं तो वस्तुत: यह भी एक सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन है। समाज के प्रति अपने कर्त्तव्यों को पूरा करने के लिए हमें भी जागरूक होना पड़ेगा। आइए इस गणतंत्र दिवस पर हम सब यह सामूहिक चेतना को जागृत करें और अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।

देश, समाज और परिवार की रक्षा के लिए हम एक कदम आगे बढ़ाएंगे तो निश्चित रूप से यह मजबूत संकल्प बनेगा और दुनिया के लिए हम एक आदर्श भावना का संचार कर सकेंगे। स्वच्छता के प्रति चेतना जगाने से न केवल हमारी रक्षा होती है बल्कि यह उच्च समाज के विकसित भाव को भी संचरित करता है।

भारतवर्ष में विविधता हर ओर दिखती है। इतनी विविधता इसके प्रकृति में है। हम सर्दी, ग्रीष्म और वर्षा ऋतु का आनंद लेते हैं। नदी, पहाड़, मैदान, पठार, रेगिस्तान और समुद्र सबकुछ हमारे देश में है। यह दुनिया के लिए बहुत अजूबा है। संसार भर के लोग इसे देखने भारत आते हैं। इस पर शोध करते हैं और अपने देश को बताते हैं। आइए हम इस गणतंत्र दिवस पर हरा संकल्प लें और देश के पर्यावरण को हरा-भरा बनाएं।

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प्रशांत सिन्हा | वरिष्ठ पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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