Chartered Aircraft Safety: भारत में चार्टर्ड विमानन तेजी से बढ़ रहा है। राजनीतिक नेता, उद्योगपति और उच्च पदस्थ अधिकारी समय बचाने के लिए चार्टर्ड विमानों और हेलिकॉप्टरों पर निर्भर होते जा रहे हैं। लेकिन बारामती विमान हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सुविधा सुरक्षा की कीमत पर हासिल की जा रही है।
Chartered Aircraft Safety: डीजीसीए में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली
संसदीय स्थायी समितियों की रिपोर्टों में बार-बार यह बात सामने आई है कि चार्टर्ड और निजी विमानन क्षेत्र में निगरानी कमजोर है। संसद में सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार डीजीसीए में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में करीब 38 प्रतिशत और एयर ट्रैफिक कंट्रोल में लगभग 23 प्रतिशत पद रिक्त हैं।
Chartered Aircraft Safety: छोटे हवाई अड्डों में निगरानी की कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्त पद होने से निरीक्षण और निगरानी प्रभावित होना स्वाभाविक है। खासकर चार्टर्ड उड़ानों में, जो छोटे हवाई अड्डों और अस्थायी हेलीपैड्स से संचालित होती हैं, वहां निगरानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
Chartered Aircraft Safety: व्यावसायिक एअरलाइंस की तुलना में अधिक लचीले नियम
संसदीय समितियों ने यह भी रेखांकित किया है कि अनिर्धारित विमान संचालकों के लिए नियम व्यावसायिक एअरलाइंस की तुलना में अधिक लचीले हैं। कई चार्टर कंपनियां सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को केवल कागजों तक सीमित रखती हैं। वास्तविक संचालन में जल्दी उड़ान भरने के दबाव में सुरक्षा जांच अधूरी रह जाती है।
भारत में चार्टर्ड विमानों और हेलिकॉप्टरों के हादसों का एक बड़ा कारण ‘कंट्रोल्ड फ्लाइट इनटू टेरेन’ है। इसमें विमान तकनीकी रूप से ठीक होता है, लेकिन खराब दृश्यता, मौसम की गलत व्याख्या या नेविगेशन त्रुटि के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। डीजीसीए के आंकड़ों के अनुसार, ऐसे मामलों में मानवीय त्रुटि की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है।
महाराष्ट्र में हाल के वर्षों में हुई कई घटनाओं ने राजनीतिक हलकों को झकझोर दिया है। देवेंद्र फडणवीस, शरद पवार, सुनील तटकरे और अन्य नेताओं से जुड़े हेलिकॉप्टर हादसे और आपात लैंडिंग इस बात का संकेत हैं कि जोखिम कितना बड़ा है। भले ही कई मामलों में जान नहीं गई, लेकिन हर घटना एक चेतावनी थी।
भारत के इतिहास में विमान हादसों में जान गंवाने वाली प्रमुख हस्तियों की सूची लंबी है। होमी भाभा से लेकर संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, वाईएस राजशेखर रेड्डी, जनरल बिपिन रावत और हाल में विजय रूपाणी तक, इन दुर्घटनाओं ने बार-बार सिस्टम की कमजोरियों को उजागर किया है।
संसदीय समितियों ने साफ सिफारिश की है कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो को डीजीसीए और मंत्रालय से पूरी तरह स्वतंत्र किया जाए। साथ ही चार्टर्ड पायलटों के लिए नियमित सिम्युलेटर प्रशिक्षण, उड़ान डेटा निगरानी और छोटे हवाई अड्डों पर आधुनिक मौसम व नेविगेशन सुविधाएं अनिवार्य की जाएं।
जब तक चार्टर्ड विमानन में सुरक्षा को मुनाफे और सुविधा से ऊपर नहीं रखा जाएगा, तब तक वीआईपी उड़ानों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में बनी रहेगी।
चार्टर्ड विमान कंपनियां क्या हैं और कैसे काम करती हैं
चार्टर्ड विमान कंपनियां वे विमानन सेवाएं होती हैं, जो तय समय-सारिणी पर नहीं, बल्कि ग्राहक की मांग के अनुसार उड़ान उपलब्ध कराती हैं। इनका उपयोग आमतौर पर उद्योगपतियों, राजनेताओं, कॉरपोरेट समूहों, फिल्मी हस्तियों, खेल टीमों और आपात परिस्थितियों में किया जाता है। भारत में ऐसी कंपनियां हेलिकॉप्टर, छोटे जेट, टर्बोप्रॉप और बिज़नेस जेट जैसे विमानों का संचालन करती हैं।
इन सेवाओं का प्रमुख लाभ यह है कि यात्री अपनी सुविधा के अनुसार उड़ान का समय, मार्ग और गंतव्य तय कर सकते हैं। चार्टर्ड उड़ानें उन शहरों और क्षेत्रों तक भी पहुंच बनाती हैं, जहां नियमित व्यावसायिक उड़ानें उपलब्ध नहीं होतीं। हालांकि, इन सेवाओं की लागत सामान्य हवाई यात्रा की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि इसमें विमान, चालक दल, ईंधन, रखरखाव और हवाई अड्डा शुल्क अलग से शामिल होते हैं। इसके बावजूद, समय की बचत और गोपनीयता के कारण चार्टर्ड विमान सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
CMARG (Citizen Media And Real Ground) is a research-driven media platform that focuses on real issues, timely debates, and citizen-centric narratives. Our stories come from the ground, not from the studio — that’s why we believe: “Where the Ground Speaks, Not the Studios.” We cover a wide range of topics including environment, governance, education, economy, and spirituality, always with a public-first perspective. CMARG also encourages young minds to research, write, and explore bold new ideas in journalism.
