विकास कुमार झा
उज्जवल कुमार झा: इन दिनों नेपाल के मधेश प्रांत के महोत्तरी (तीन) संसदीय क्षेत्र का गांव एकडारा भले ही नेपाल के युवा तुर्क प्रधानमंत्री बालेन साह का पैतृक गांव होने के कारण चर्चा के केंद्र में है, लेकिन बीते अनेक दशकों से एकडारा गांव की प्रतिष्ठा इस गांव के महापंडित ज्योतिषाचार्य स्व. सरयुग रमण झा के गांव होने के कारण रही है। पंडित जी का सम्मान ऐसा था कि शासन से लेकर जनसाधारण तक उनके परिसर में आकर मत्था टेकता था और आशीर्वाद प्राप्त करता था।
नेपाल के हाल के संसदीय चुनाव में पंडित जी के परपोते उज्ज्वल कुमार झा महोत्तरी (तीन) संसदीय क्षेत्र से बालेन साह की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ से युवा तुर्क सांसद बने हैं। पूरे अंचल से लेकर सीमावर्ती भारत के गांवों तक सांसद उज्ज्वल कुमार झा की लोकप्रियता का जवाब नहीं है।
उज्ज्वल ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। नेपाल के भीषण भूकंप के बाद उसकी क्षति से निपटने के लिए गठित ‘भूकंप प्राधिकरण’ में उज्ज्वल कुमार झा ने अपनी सेवा की शुरुआत की। इसके बाद वे नेपाल के वाणिज्य मंत्रालय से संबद्ध कर दिए गए। इसके उपरांत उन्हें नेपाल-चीन और भारत-नेपाल के लिए प्रस्तावित ‘ड्राइ पोर्ट’ यानी सूखा बंदरगाह का संपूर्ण प्रभार सौंपा गया।
इसी क्रम में वे बीरगंज में सूखा बंदरगाह सह संयुक्त जांच चौकी के कार्यालय प्रमुख नियुक्त किए गए। जलेश्वर-भिट्ठा मोड़ सूखा बंदरगाह, जो अभी निर्माणाधीन है, का प्रारूप भी उन्हीं का बनाया हुआ है। इसके पश्चात नौकरी छोड़कर वे पूर्णकालिक तौर पर सक्रिय राजनीति में आ गए।
उज्ज्वल के पितामह, यानी स्व. पंडित सरयुग रमण झा के पुत्र स्व. कुलानंद झा भी नेपाल के नामी-गिरामी राजनीतिज्ञ थे। लगातार तीन कार्यकाल यानी बारह वर्षों तक स्व. कुलानंद झा महोत्तरी के जिला सभापति रहे। उनके पहले इस पद पर फूल सिंह थे, जिनका नाम महोत्तरी में दहशत का पर्याय माना जाता था। युवा तुर्क कुलानंद झा ने महोत्तरी के आतंक फूल सिंह को लगातार तीन चुनावों में पराजित किया। चुनावों में उन्हें हराने के बाद कुलानंद झा महोत्तरी संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी बने और भारी मतों से विजयी हुए।
उज्जवल कुमार झा के पितामह को ‘नेपाल का राज नारायण’ कहा जाता था
स्व. कुलानंद झा जितने परहितकारी थे, उतने ही दबंग भी थे। इसी कारण उन्हें ‘नेपाल का राज नारायण’ कहा जाता था। वे हमेशा अपने साथ एक बेंत रखते थे। नेपाल की संसद में जब उन्हें बेंत लेकर जाने से रोका गया, तो उन्होंने भारी विरोध किया। नतीजतन, नेपाल नरेश की अनुमति से बेंत समेत सदन में जाने की अनुमति केवल उन्हें ही दी गई। कहा जाता है कि कई बार विशेष परिस्थितियों में वे अपनी बेंत किसी समर्थक को देकर सरकारी दफ्तरों में संदेश भिजवाते थे, और किसी भी सरकारी कर्मचारी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह उनके आदेश को ठुकरा दे।
स्व. कुलानंद झा के बाद उनके पुत्र मनोज कुमार झा मुखिया बने। और अब मनोज कुमार झा के पुत्र उज्ज्वल नेपाल की प्रतिनिधि सभा (नेपाली संसद) के सदस्य हैं। एकडारा के ग्रामीणों का कहना है कि उज्ज्वल भी अपने पितामह स्व. कुलानंद झा की तरह एकबाली स्वभाव के हैं।
बहरहाल, बतौर सांसद उज्ज्वल की प्राथमिकताओं में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और युवा पीढ़ी के लिए अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराना शामिल है। वे मुस्कराकर कहते हैं, “बीते समय में जो-जो माननीयगण आम जनों से जो वचन दे गए हैं, उनमें से भी कई को भरसक पूरा कराने का प्रयास रहेगा।”
लेखक विकास कुमार झा, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
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