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Dr. Govind Jha Demise: मिथिला ने खोया संस्कृत का मर्मज्ञ विद्वान, स्मृतियों में शेष रहेंगे डॉ. गोविंद झा

Dr. Govind Jha Demise: ज्ञान और संस्कारों के एक युग का अंत, मिथिला स्तब्ध है।

Dr. Govind Jha Demise: बिहार के जाने-माने शिक्षाविद, संस्कृत के प्रतिष्ठित विद्वान तथा कुशल प्रशासक डॉ. गोविंद झा का मंगलवार, 23 दिसंबर 2025 को दोपहर 3:45 बजे पटना स्थित रूबन अस्पताल में निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे मिथिला के सामाजिक एवं शैक्षणिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

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निधन की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव खराजपुर (दरभंगा) में शोक का वातावरण व्याप्त हो गया। जब उनका पार्थिव शरीर गांव स्थित आवास पर पहुंचा, तो अंतिम दर्शन के लिए शोक व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। बुधवार को उनके ज्येष्ठ पुत्र आनंद झा ने वैदिक विधि-विधान के साथ उन्हें मुखाग्नि दी।

Dr. Govind Jha Demise: राजनीति एवं समाज की प्रबुद्ध विभूतियों ने जताया शोक

डॉ. गोविंद झा के असामयिक निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षणिक जगत की अनेक विभूतियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सराबगी, दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर, भाजपा विधायक मुरारी झा, मधुबनी के सांसद अशोक कुमार यादव, झंझारपुर के विधायक एवं भाजपा के पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा, जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, दरभंगा के पूर्व सांसद विजय कुमार मिश्रा, भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर, भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा, बिहार सरकार के सहकारिता एवं वन-पर्यावरण मंत्री प्रमोद कुमार तथा समाजसेवी कीर्ति नारायण झा प्रमुख रूप से शामिल हैं। सभी गणमान्य व्यक्तियों ने उनके व्यक्तित्व को याद करते हुए उनके निधन को समाज के लिए एक बड़ा रिक्त स्थान बताया।

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Dr. Govind Jha Demise: शिक्षाविदों और गणमान्य नागरिकों ने बताया ‘अपूरणीय क्षति’

इसी क्रम में डॉ. बीरबल झा, उमानाथ सिंह सीनियर एडिटर (डिजिटल) प्रसार भारती, दिलीप कुमार झा, प्रो. अनिल कुमार झा, डॉ. दिलीप झा, डॉ. श्रीपति त्रिपाठी, प्रो. पुरेंद्र वारिक, डॉ. शिवलोचन झा, डॉ. पवन झा, डॉ. दिनेश झा, डॉ. अवनींद्र झा, डॉ. भवेश झा, डॉ. दयानंद झा, डॉ. रामसेवक झा, डॉ. धनश्याम मिश्र, डॉ. ध्रुव मिश्र, डॉ. उमेश झा, कथावाचक डॉ. नटवर नारायण दास तथा बिहार वाणिज्य कर सेवा के सेवानिवृत्त अपर आयुक्त मोहन झा ने भी अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। साथ ही सुधांशु शेखर झा, रमेश झा, ओमकार नाथ झा, सुधीर चौधरी, पारस नाथ मिश्र, शारदानंद झा, अरुण झा, विकासानंद झा, शंभू नाथ झा, डॉ. सी.एस. झा, चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा एवं सचिव मंजू झा सहित अनेक शिक्षाविदों ने इसे बिहार और मिथिला के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि उनके जाने से उत्पन्न हुई इस रिक्तता की भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।

डॉ. गोविंद झा कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के एक प्रतिष्ठित विद्वान, समर्पित शिक्षाविद और कुशल प्रशासक थे। वे दशकों तक रामेश्वरी लता महाविद्यालय, दरभंगा के प्राचार्य रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय में अध्यापन, शोध एवं प्रशासन के क्षेत्र में दीर्घकाल तक उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान कीं। अपने सेवाकाल के दौरान वे विश्वविद्यालय के विभिन्न शीर्ष एवं महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे। उनके नेतृत्व में अकादमिक अनुशासन सुदृढ़ हुआ, संस्थागत गरिमा को नई ऊंचाइयां मिलीं और संस्कृत अध्ययन की परंपरा को मजबूत आधार प्राप्त हुआ।

Dr. Govind Jha Demise: भारतीय ज्ञान-परंपरा के वे गहन अध्येता थे

संस्कृत साहित्य, दर्शन एवं भारतीय ज्ञान-परंपरा के वे गहन अध्येता थे। शास्त्र उनके लिए केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन-दृष्टि थे। उनके मार्गदर्शन में अनेक छात्र-छात्राओं ने उच्चस्तरीय शोध कार्य संपन्न किए। वे ऐसे गुरु थे, जो शब्दों से कम और आचरण से अधिक शिक्षित करते थे। उनके सान्निध्य में विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक उपलब्धियां मिलीं, बल्कि बौद्धिक अनुशासन और नैतिक मूल्यों का भी सुदृढ़ संस्कार प्राप्त हुआ।

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व्यक्तिगत जीवन में डॉ. गोविंद झा सरलता, विनम्रता और मूल्यनिष्ठा के मूर्त प्रतीक थे। उनकी वाणी में सौम्यता, व्यवहार में शालीनता और दृष्टि में दूरदर्शिता सहज रूप से परिलक्षित होती थी। उन्होंने अपने जीवन और कर्म से यह प्रमाणित किया कि सच्चा शिक्षाविद वही होता है, जो ज्ञान के साथ-साथ संस्कार भी प्रदान करे।

संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार तथा मिथिला की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को सुदृढ़ करने में उनका योगदान चिरस्थायी और स्मरणीय रहेगा। भले ही आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, किंतु विद्या, विवेक और सेवा के प्रतीक के रूप में वे सदैव स्मृतियों में जीवित रहेंगे। डॉ. गोविंद झा अपने पीछे पत्नी, चार पुत्र, तीन बहुएं, एक पुत्री, दामाद, पोते-पोतियां और नाती-नतिनों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

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