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प्रोफेशनल बिहार अभियान: पटना की सड़कों पर उतरे युवा, कौशल से नेतृत्व गढ़ने का संदेश

प्रोफेशनल बिहार अभियान: “लेबर टू लीडरशिप” पहल युवाओं को सोचने का एक नया नजरिया देती है।

पटना की सड़कों पर गुरुवार को सैकड़ों छात्र-युवा क्यों उतर आए—इस सवाल का जवाब “प्रोफेशनल बिहार अभियान” में छिपा है, जिसकी शुरुआत के साथ बोरिंग रोड इलाके में जागरूकता मार्च निकाला गया।  British Lingua पटना की ओर से शुरू की गई इस पहल “फ्रॉम लेबर टू लीडरशिप – लेट्स बिल्ड अ प्रोफेशनल बिहार” का मकसद राज्य की पारंपरिक श्रम-आधारित छवि को बदलकर उसे कौशल, संचार और पेशेवर दक्षता के आधार पर नई पहचान देना है।

अभियान की औपचारिक शुरुआत संस्थान के बोरिंग रोड स्थित परिसर में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुई, जहां बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक और मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर जोर दिया कि बिहार के युवाओं में क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसरों की जरूरत है।

प्रोफेशनल बिहार अभियान: बिहार कौशल विकास बड़ा अभियान

संस्थान के प्रबंध निदेशक और प्रख्यात लेखक डॉ. बीरबल झा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य की सबसे बड़ी चुनौती प्रतिभा का अभाव नहीं, बल्कि अवसरों, आत्मविश्वास और पेशेवर कौशल की कमी है। उन्होंने कहा, “जब तक हम कौशल और प्रभावी संचार को नहीं अपनाएंगे, तब तक श्रम को नेतृत्व में नहीं बदला जा सकता।” उन्होंने इस पहल को एक दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम बताया।

डॉ. झा ने अभियान की चार-चरणीय कार्ययोजना का विस्तार से उल्लेख किया। उनके मुताबिक पहले चरण में जागरूकता और जन-संपर्क पर फोकस किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इस संदेश को पहुंचाया जा सके। दूसरे चरण में युवाओं को कौशल और संचार प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीसरे चरण में उन्हें पेशेवर रूप से तैयार कर रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाएगा, जबकि अंतिम चरण में नेतृत्व क्षमता और उद्यमिता के विकास पर काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शुरुआत में हजारों युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है और धीरे-धीरे इस मॉडल को राज्य के विभिन्न जिलों तक फैलाया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रो. मनोज कुमार मिश्रा ने कहा कि कड़ी मेहनत, कौशल और संचार ही किसी भी व्यक्ति को नेतृत्व की ओर ले जाते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रम की गरिमा को समझें और शिक्षा, अनुशासन तथा नवाचार के जरिए अपने भविष्य को मजबूत बनाएं। उनके अनुसार, बिहार जैसे राज्य में अगर युवा इन मूल्यों को अपनाते हैं तो यह न केवल व्यक्तिगत विकास बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकता है।

वहीं, कार्यक्रम में वक्ता के रूप में मौजूद सचिन उपाध्याय ने कहा कि “लेबर टू लीडरशिप” पहल युवाओं को सोचने का एक नया नजरिया देती है। उनके मुताबिक यह अभियान बिहार के कार्यबल को केवल मेहनतकश पहचान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे कौशल, दृष्टि और एकजुटता के जरिए पेशेवर और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने का प्रयास करता है।

प्रोफेशनल बिहार अभियान: युवाओं के हाथ में है राज्य का भविष्य

कार्यक्रम के समापन पर सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हरिद्वार ठाकुर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य का भविष्य उसके युवाओं के हाथ में है और उन्हें पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर पेशेवर दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने इस तरह की पहलों को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे युवाओं में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

संस्थान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ ब्रिटिश लिंगुआ इस अभियान में ज्ञान और प्रशिक्षण साझेदार की भूमिका निभाएगा। संस्था अपने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल कक्षाओं तक सीमित न रखकर सामुदायिक स्तर पर भी लागू करेगी, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को इसका लाभ मिल सके। इसके तहत संस्थागत सहयोग, सामुदायिक भागीदारी और व्यावहारिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी।

अभियान के जरिए खास तौर पर उस समस्या को संबोधित करने की कोशिश है, जिसमें बड़ी संख्या में युवा कम-कौशल के साथ रोजगार की तलाश में राज्य से बाहर पलायन करते हैं। आयोजकों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर कौशल, संचार और पेशेवर प्रशिक्षण को मजबूत किया जाए, तो न केवल पलायन कम होगा, बल्कि राज्य में ही रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि “प्रोफेशनल बिहार” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा। इस पहल को एक ऐसे दीर्घकालिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो बिहार को एक कुशल, आत्मनिर्भर और पेशेवर राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

 

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