जखनी मॉडल: सूखे बुंदेलखंड में लहलहाईं फसलें, कुएं भी भर गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ग्राम प्रधानों को लिखे पत्र में सबसे पहले मेड़बंदी का ही जिक्र किया था। बांदा का जखनी गांव इस मामले में रोल मॉडल बना और उसका नतीजा यह है कि यहां का जलस्तर में तेजी से इजाफा हुआ। केंद्रीय भूजल बोर्ड, नीति आयोग भारत सरकार और जलशक्ति मंत्रालय ने इस जखनी मॉडल को स्वीकारा।

IPL विश्व क्रिकेट की सूरत ही बदल दी

पहले ही साल में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा शुरू किए गए आईपीएल ने विश्व ख्याति प्राप्त की, लेकिन नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकवादियों (Mumbai Attack) ने हमला कर दिया, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बहुत अहम फैसला लिया और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के आईपीएल में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया।

Plasma Therapy: Covid-19 को मात देकर निकले लोगों का Blood बना पारस पत्थर

डोनर का एंटीबॉडी उसके स्वस्थ होने के 2 हफ्ते बाद ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ यह भी जरूरी है कि उसका कम से कम दो बार कोविड-19 (Covid-19) का टेस्ट कराया गया हो।

कोविड-19 की मार: छोटे उद्यमी और श्रमिकों के लिए इधर कुंआ उधर खाई

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे (National Sample Survey Office – NSSO) और पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेज (Periodic Labour Force Survey- PLFS) के मुताबिक करीब 14 करोड़ गैर कृषि रोजगारों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, इनमें स्थायी कर्मचारी ही नहीं, दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं, वहीं देशभर में असंगठित क्षेत्रों की नौकरियों पर भी छंटनी का खतरा मंडरा रहा है।

जानिए कितना अलग है पीएमएनआरएफ (PMNRF) से पीएमकेयर्स (PMCARES)

पीएमएनआरएफ (PMNRF) की स्थापना तब पाकिस्तान से विस्थापित हुए लोगों की मदद करने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में इस राहत कोष का उपयोग बड़ा व्यापक हो गया था।

धरती नापी, सागर छाना, चूम लिया आकाश और अब असहाय

विश्व का सबसे शक्तिशाली और लगभग सभी देशों पर परोक्ष-अपरोक्ष दबाव बनाने का माद्दा रखने (और दम्भ भरने) वाला संयुक्त राज्य अमेरिका आज खुद को इतना लाचार, बेबस और निरीह महसूस कर रहा है, मानों वह टूट सा गया है।

घड़ी मुश्किल है, लेकिन उम्मीद का दामन न छोड़ें, सहारा दें, मदद को आगे आएं

हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि देश को चलाने के लिए बड़े बुद्धिजीवियों से कहीं ज्यादा जरूरत उन लोगों की होती है, जो शारीरिक श्रम करते हैं। किसी कंपनी का उत्पादन उसके श्रम पर निर्भर करता है न कि इस पर कि वहां कितने प्रबंधक (Manager) हैं।

‘दंगाइयों’ का पोस्टर: न्यायपालिका और कार्यपालिका में मतभेद

प्रदेश सरकार ने उन्हें अपराधी घोषित करते हुए उनकी संपत्ति को सार्वजनिक रूप से नीलाम करने की घोषणा कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे निजता के अधिकार की सुरक्षा का सवाल माना।

कौन नागरिक और कौन गैर नागरिक, ऐसे समझें पूरी कहानी

देेश का बुद्धिजीवी वर्ग तरह-तरह के तर्क देता है कि इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों लोगों को एनआरसी से बाहर किया जाएगा तो उनका क्या होगा? क्या उनके मूल देश उन्हें स्वीकार करेंगे? ऐसे में वह भारत में ही रहेंगे तो एनआरसी की जरूरत क्या? लेकिन मुझे इतना जरूर पता अगर वह बन गया तो अवैध रूप से भारत में आए बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, म्यांमार घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर के भीतर रख दिया जाएगा।