आभासी दुनिया का सच: किशोर हो रहा युवा, लेकिन दिल है कमजोर

असल में हम हकीकत की बजाय आभासी दुनिया में ज्यादा वक्त रहते हैं। इससे हमारे मनमस्तिष्क में बुरे और गंभीर हालात को झेलने के लिए जो रसायन चाहिए, वह नहीं बन रहा।

आओ मिलकर नई दुनिया की संरचना करें, अपनों को अपनी जड़ों से जोड़े रखें

भगवान ने जो आंखें दी है, उससे हमें सब लोग दिखाई पड़ते हैं, लेकिन हम खुद को नहीं देख सकते हैं। भगवान चाहते हैं कि सामने वाले को हंसते हुए, खुशी से रहते हुए और आनंद की अनुभूति करते हुए हम देख सकें।

गुस्ताखी करने की मत कर हिमाकत

एक फिल्म स्टार एक एड शूट कर एक दिन में ही करोड़ों रुपए कमा लेता है, लेकिन एक आम आदमी जिंदगी के साठ बरस तक नौकरी और मजदूरी करके भी एक करोड़ नहीं कमा पाता है।

जखनी मॉडल: सूखे बुंदेलखंड में लहलहाईं फसलें, कुएं भी भर गए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ग्राम प्रधानों को लिखे पत्र में सबसे पहले मेड़बंदी का ही जिक्र किया था। बांदा का जखनी गांव इस मामले में रोल मॉडल बना और उसका नतीजा यह है कि यहां का जलस्तर में तेजी से इजाफा हुआ। केंद्रीय भूजल बोर्ड, नीति आयोग भारत सरकार और जलशक्ति मंत्रालय ने इस जखनी मॉडल को स्वीकारा।

अफगानिस्तान के बहाने पूरे होंगे चीन के नापाक मंसूबे! दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका

समझौते के बाद से ही खतरनाक आतंकी संगठन आईएसआईएस का अफगानिस्तान में दखल बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि आईएसआईएस का मध्य एशिया के बाद दूसरा लक्ष्य दक्षिण एशिया के देश हैं। भारत सरकार को आने वाले इस महासंकट से सावधान रहना होगा क्योंकि तालिबान और पाकिस्तान की मिलीभगत से हुए कंधार विमान अपहरण का दंश हम झेल चुके हैं।

अच्छे नहीं चल रहें ‘दबंग’ के दिन, कोरोना से पहले अफगानिस्तान में अमेरिका की मात

समझौते की दूसरी शर्त के मुताबिक तालिबान को आतंक के रास्ते से हटना था, लेकिन दोनों पक्षों में बातचीत के चौबीस घंटे बीतने से लेकर अब तक आधा दर्जन से अधिक आतंकी हमले हो चुके हैं।

लॉकडाउन में जरूर देखें ये 5 अंडररेटेड कॉमेडी मूवीज

अगर आपको डेडपूल जैसी फिल्में पसंद हैं तो इस फिल्म को जरूर देखिए। 2018 में आई इस फिल्म में अभिमन्यु दासानी और राधिका मदान को मुख्य किरदार में दिखाया गया है। इसमें एक सूर्या नाम के एक लड़के के शरीर में दर्द ना होने की बीमारी दिखाई गई है।

IPL विश्व क्रिकेट की सूरत ही बदल दी

पहले ही साल में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा शुरू किए गए आईपीएल ने विश्व ख्याति प्राप्त की, लेकिन नवंबर 2008 में मुंबई में आतंकवादियों (Mumbai Attack) ने हमला कर दिया, जिसके बाद भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने एक बहुत अहम फैसला लिया और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के आईपीएल में खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया।

Plasma Therapy: Covid-19 को मात देकर निकले लोगों का Blood बना पारस पत्थर

डोनर का एंटीबॉडी उसके स्वस्थ होने के 2 हफ्ते बाद ही इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ यह भी जरूरी है कि उसका कम से कम दो बार कोविड-19 (Covid-19) का टेस्ट कराया गया हो।

कोविड-19 की मार: छोटे उद्यमी और श्रमिकों के लिए इधर कुंआ उधर खाई

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे (National Sample Survey Office – NSSO) और पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेज (Periodic Labour Force Survey- PLFS) के मुताबिक करीब 14 करोड़ गैर कृषि रोजगारों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है, इनमें स्थायी कर्मचारी ही नहीं, दिहाड़ी मजदूर भी शामिल हैं, वहीं देशभर में असंगठित क्षेत्रों की नौकरियों पर भी छंटनी का खतरा मंडरा रहा है।

तेल की कम खपत और अधिक उत्पादन से मुश्किल में ओपेक

भारत जैसा तेल आयातक (Importer) देश कुल खपत (consumption) का 82 परसेंट तेल आयात करता है, जिसमें से 28 परसेंट क्रूड ऑयल (Crude Oil) होते हैं। क्रूड आयल को आम भाषा में कच्चा तेल कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम पेट्रोलियम और कच्चे तेल को जिसमें मापते हैं, उसे बैरल (Barrel) कहते हैं।

प्रकृति के अनुशासन को तोड़ा तो भयावह होगा मंजर

तीसरी दुनिया के देश सिर्फ उनको सिर्फ हसरत भरी नजरों से देखते हुए अपने को आधुनिक उन्नति की राह पर आगे बढ़ने में लगे हैं, ये विकासशील राष्ट्र कहे जाते हैं, जबकि पिछड़े सभी राष्ट्र दूसरी दुनिया या अविकसित राष्ट्र मान लिए गए हैं।

जानिए कितना अलग है पीएमएनआरएफ (PMNRF) से पीएमकेयर्स (PMCARES)

पीएमएनआरएफ (PMNRF) की स्थापना तब पाकिस्तान से विस्थापित हुए लोगों की मदद करने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में इस राहत कोष का उपयोग बड़ा व्यापक हो गया था।

अरब मुल्क: खूनखराबे में लाखों खाक, नहीं रुक रही आपसी जंग

भारत को जीत कर तुर्कों ने बाबर के सामने यह शर्त रखी थी कि वह उसे मुस्लिम देश बना देगा। इन अरब देशों में आपसी युद्ध की एक प्रमुख वजह यह है कि जिन हालातों में इन इस्लामिक देशों का विकास हुआ था, कुछ लोग अब भी उन्ही हालातों को बनाए रखना चाहते हैं।

बीस साल पहले Film ‘हेरा फेरी’ से मिली Real Comedy को नई जान

फ़िल्म में संजय दत्त को श्याम की भूमिका (Role) के लिए चुना गया था, लेकिन ड्रग्स और प्रतिबंधित हथियारों को रखने के मामले में जेल जाने और मुकदमे में फंसे होने से उनको इस प्रोजेक्ट से बाहर निकलना पड़ा।

धरती नापी, सागर छाना, चूम लिया आकाश और अब असहाय

विश्व का सबसे शक्तिशाली और लगभग सभी देशों पर परोक्ष-अपरोक्ष दबाव बनाने का माद्दा रखने (और दम्भ भरने) वाला संयुक्त राज्य अमेरिका आज खुद को इतना लाचार, बेबस और निरीह महसूस कर रहा है, मानों वह टूट सा गया है।

अब मुफ्त में नहीं घूम सकेंगे भूटान, पड़ोसी देश भी दूर

निर्णय को देश की नेशनल असेंबली ने भूटान टूरिज्म लेवी एंड एक्जम्पशन बिल (Bhutan tourism levy and exemption bill) के रूप में पारित किया है।

जानकारी: रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर; जानें क्या हैं इनके मायने

रिजर्व बैंक ने देश के आर्थिक हालात को सुधारने के लिए कुछ नए कदम उठाए हैं।

सारी निराशाओं के बावजूद हम जीतेंगे

स्थिति इससे भी भयावह और वीभत्स है, परन्तु सब कुछ लिखकर डराना नहीं चाहता हूं, मैंने पहले ही कहा है कि “मुश्किलें और चुनौतियां बड़ी हैं, पर डर और भयभीत रहना भी उपाय नहीं है।”

Corona से निपटने में SAARC निभा सकता है बड़ी भूमिका

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सार्क देशों ने COVID-19 को लेकर रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक मीटिंग की।

कोरोना वायरस: दुनिया के लिए खतरनाक बनी चीन के खानपान की आदत

चीन से नई-नई बीमारियों के फैलने की एक बड़ी वजह वहां का फूड मार्केट है। चीन के शहरों में फल-सब्जी से लेकर मीट के मार्केट फैले हुए हैं।

‘दंगाइयों’ का पोस्टर: न्यायपालिका और कार्यपालिका में मतभेद

प्रदेश सरकार ने उन्हें अपराधी घोषित करते हुए उनकी संपत्ति को सार्वजनिक रूप से नीलाम करने की घोषणा कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे निजता के अधिकार की सुरक्षा का सवाल माना।

नेताओं की Policy से यूं हो रहें किसान तबाह

किसान अपनी सोने जैसी फसलों को औने पौने दामों पर गांव के बिचोलियों को बेच देता है और वही बिचोलिया पांच गुना ज्यादा भाव में ले जाकर बाजार में बेचता है। आखिर सरकार क्यों नहीं गांवों मे एक स्थायी फसल खरीद केंद्र की स्थापना करती है और वहां पर किसी जिम्मेदार अधिकारी की नियुक्ति करती है।

कौन नागरिक और कौन गैर नागरिक, ऐसे समझें पूरी कहानी

देेश का बुद्धिजीवी वर्ग तरह-तरह के तर्क देता है कि इतने बड़े पैमाने पर करोड़ों लोगों को एनआरसी से बाहर किया जाएगा तो उनका क्या होगा? क्या उनके मूल देश उन्हें स्वीकार करेंगे? ऐसे में वह भारत में ही रहेंगे तो एनआरसी की जरूरत क्या? लेकिन मुझे इतना जरूर पता अगर वह बन गया तो अवैध रूप से भारत में आए बांग्लादेशी, पाकिस्तानी, म्यांमार घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर के भीतर रख दिया जाएगा।