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बिहार विधान परिषद के अंडर सेक्रेटरी सुधीर चौधरी का निधन, शोक की लहर

सुधीर कुमार चौधरी।

सुधीर कुमार चौधरी का निधन: बिहार विधान परिषद के अंडर सेक्रेटरी सुधीर कुमार चौधरी का 27 फरवरी को दिल्ली स्थित आईएलबीएस अस्पताल में इलाज के दौरान 55 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर मिलते ही परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और सामाजिक-सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक छा गया। शनिवार को हरिद्वार में पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र आयुष कीर्ति ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के साथ करीबी रिश्तेदार और शुभचिंतक मौजूद रहे।

विधान परिषद में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे

सुधीर कुमार चौधरी बिहार विधान परिषद में अंडर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे। वे एक जिम्मेदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में जाने जाते थे। अपने काम को लेकर वे हमेशा गंभीर और सजग रहते थे। सहकर्मी बताते हैं कि वे कार्यालय में अनुशासन और पारदर्शिता को सबसे ज्यादा महत्व देते थे। किसी भी फाइल या प्रशासनिक प्रक्रिया को वे पूरी सावधानी से देखते थे। उनका व्यवहार सरल और विनम्र था, जिसके कारण वे सभी के बीच सम्मानित थे।

पटना की मिथिला कॉलोनी सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र था

पटना की मिथिला कॉलोनी में उनका घर केवल एक निजी निवास नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता था। कॉलोनी में विद्यापति भवन की स्थापना और उसके रखरखाव में उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने इस भवन को केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद का मंच बनाने का प्रयास किया। यहां समय-समय पर साहित्यिक गोष्ठियां, पारंपरिक पर्व-त्योहार और सामुदायिक बैठकें आयोजित होती थीं। उनके प्रयासों से कॉलोनी के लोग आपसी जुड़ाव और सांस्कृतिक चेतना के साथ आगे बढ़ते रहे।

मधुबनी जिले के अपने पैतृक गांव कोठिया से भी उनका गहरा लगाव था। गांव की मिट्टी से उनका भावनात्मक संबंध बना रहा। वे जब भी गांव जाते, स्थानीय लोगों से मिलते-जुलते और गांव के विकास से जुड़ी बातों पर चर्चा करते थे। दुर्गापूजा के आयोजन में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। पूजा की तैयारी से लेकर कार्यक्रमों के संचालन तक वे हर काम में रुचि लेते थे। युवाओं को संगठित करना और उन्हें जिम्मेदारी देना उनकी खास पहचान थी। वे मानते थे कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का मजबूत माध्यम होते हैं।

मिथिला की कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी वे लगातार सक्रिय रहे। लोक-संस्कृति से उनका विशेष लगाव था। वे विभिन्न मंचों पर मिथिला की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने की बात करते थे। उनका मानना था कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना जरूरी है, तभी समाज की पहचान बनी रह सकती है। इस सोच के साथ उन्होंने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया और लोगों को प्रेरित किया।

बिहार विधान परिषद और बाहर काफी लोकप्रिय थे

सामाजिक कार्यों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। किसी के घर में परेशानी हो या आर्थिक संकट, वे अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते थे। मित्रों और रिश्तेदारों के बीच वे एक भरोसेमंद व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। कई लोग बताते हैं कि कठिन समय में उन्होंने चुपचाप मदद की, बिना किसी दिखावे के। उनकी संवेदनशीलता और सहृदयता ने उन्हें समाज में अलग पहचान दिलाई।

राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत के लोगों ने जताई संवेदना

उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक लोगों ने शोक व्यक्त किया है। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरोगी, बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन झा, दरभंगा के सांसद गोपालजी ठाकुर, दरभंगा के पूर्व सांसद विजय कुमार मिश्रा, मधुबनी के सांसद अशोक यादव, झंझारपुर के सांसद रामप्रीत मंडल, झंझारपुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री नीतीश मिश्र, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा, चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा तथा सचिव मंजू झा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुधीर कुमार चौधरी का असामयिक निधन समाज और प्रशासनिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

सुधीर कुमार चौधरी अपने पीछे पत्नी और दो पुत्रों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनका जाना केवल एक परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन में सेवा, समर्पण और सांस्कृतिक जागरूकता को प्राथमिकता दी। उनकी सादगी, कर्मनिष्ठा और समाज के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

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