Cultural

“मां की साड़ी कभी पुरानी नहीं होती”

सुजाता और सपना ने अगले दिन मां को बाजार ले जाने का प्लान बनाया। बच्चों के जिद्द करने से सीतलजी ने दो साड़ी ले ही ली। लेकिन फिर भी उनकी अलमारी पहले से ही भरी थी।

Cultural

शास्त्री जी की पहचान – सादगी, विनम्रता ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति

सोवियत संघ में शास्त्री जी के असामयिक निधन की वजह से उनको सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न उनको उनके जीवनकाल में नहीं दिया जा सका था। मरणोपरांत भारत रत्न पाने वाले वे पहले नागरिक थे।

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जुल्म के विरुद्ध संघर्ष में महात्मा गांधी ने पत्रकारिता को बनाया साधन

अपनी आत्मकथा सत्य के प्रयोग में लिखा है कि अखबार के लिए विज्ञापन लेना पत्रकारिता को बेचने जैसा है। कहते हैं कि पत्रकारिता का व्यय पाठक संख्या बढ़ाकर निकालनी चाहिए, विज्ञापन लेकर नहीं। इसका उद्देश्य आर्थिक लाभ कमाना दूर-दूर तक नहीं था।

Cultural

प्रयागराज में गांधी, अनिल के संग्रहालय में हैं ‘मोहन से महात्मा तक’

अनिल के म्यूज़ियम में 125 देशों में गांधी पर जारी करीब 3750 डाक टिकट ही नहीं, बल्कि बापू पर दुनिया भर से अब तक जारी लगभग हर करंसी, सिक्के, पोस्टकार्ड, पोस्टल स्टेशनरी, ग्रीटिंग्स, सोविनियर और स्पेशल कवर्स भी मौजूद हैं।

Cultural

सवाई माधोपुर राजस्थान स्थित “आदिदेव त्रिनेत्र गणेश” जी पधारे मुंबई

बिन्नानी परिवार ने वहां के प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतों, द्वारों, सीढ़ियों, गुफाओं को भी यहां बनाया है। इस झांकी का निर्माण कपड़े और कागज से किया गया है। हूबहू उस मंदिर की प्रतिकृति देखनी हो तो यह झांकी अनुपम है। यहां गणेश जी का विसर्जन भी नहीं किया जाता।

Cultural

कैमरे की नजर से देखें प्रकृति के विविध रंग, महसूस करें निकटता

नोएडा के मारवाह स्टूडियो में आयोजित सातवें ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल में बोस्निया हर्ज़ेगोविना के भारत में राजदूत मुहम्मद सेनजिक की फोटोग्राफी की वर्चुअल प्रदर्शनी में विशिष्ट हस्तियों ने अपने विचार रखे।

Cultural Social

भारत में हर दस किमी में बदल जाती है बोली : संदीप मारवाह

सातवें ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल नोएडा के वर्चुअल आयोजन में जुटीं देश विदेश की जानी मानी हस्तियों ने हिंदी दिवस पर रखे अपने विचार। कहा हिंदी भाषा शब्दों की प्रेरणा शक्ति है।

Language, HIndi, English
Cultural

“मैं तो ENGLISH पढ़ा-लिखा, मुझे हिंदी न समझाओ तुम”

अंग्रेजी न जानना कोई अपराध नहीं है। अंग्रेजी सभ्यता में न तो हम पले-बढ़े हैं और न ही यह हमारी भाषा, लेकिन जो लोग हिंदी नहीं जानते हैं, वे जरूर अपराध कर रहे हैं। हिंदी समाज में जन्म लेकर हिंदी से इतनी नफरत मानसिक बीमारी जैसा है।

Languages, Culture
Cultural

भाषाओं का अवसान यानी पहचान का गला घोंटना

भाषाओं के लुप्त होने के साथ ही हमारी विविधता भी खत्म होगी। हमें ध्यान रखना होगा कि हमारी विविधता ही हमारी ऊर्जा है। इकहरापन हमें नीरस बनाता है, जिससे हमें जल्दी ऊब जाते हैं।

Heritage and Tradition
Cultural

दूर हुए खजूर, पुराण से कुरान तक में है खूबियों की चर्चा

यही एकमात्र पेड़ है, जिसकी पत्तियां कभी झड़ती नहीं हैं। हर ऋतु में एक ही रहती है। आयुर्वेद तथा वैद्यक शास्त्र में विभिन्न उपचार के लिए इसके फलों, पत्तों, जड़ को महत्वपूर्ण माना गया है।