कृषि कानून वापस: शीर्ष सत्ता का ऐसे हिल जाना…

दो सौ सालों तक दुनिया को अपना गुलाम बनाकर रखने वाली ब्रिटिश हुकूमत के वर्तमान प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने हाल ही में ग्लासगो में हुए सीओपी26 जलवायु शिखर सम्मेलन (वर्ल्ड लीडर्स समिट) में पीएम मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा की थी।

कृषि कानून वापस: राजनीति की जीत हुई या सत्ता की हार

पीएम मोदी ने कहा, “मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए सच्चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में ही कोई कमी रही होगी, जिसके कारण दीये के प्रकाश जैसा सत्य कुछ किसान भाइयों को हम समझा नहीं पाए हैं।”

“किसान आंदोलन का मतलब जनता का रास्ता रोकना नहीं, आप हटें”

न्यायमूर्ति एस एस कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि कानूनी रूप से चुनौती लंबित है फिर भी न्यायालय विरोध के अधिकार के खिलाफ नहीं है लेकिन अंततः इसका कोई समाधान निकालना होगा।

जिद का किसान आंदोलन, हिंसक रवैया से टूट रहा लोगों का सब्र

इस आंदोलन में दोनों पक्ष अड़े हुए हैं। इससे इसके किसी समझौते तक पहुंचने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। दूसरी तरफ उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जब तीनों कृषि कानूनों पर रोक लगा दी गई है, तो किसान संगठन किसके खिलाफ विरोध कर रहे हैं।