Bangladesh: 200 सालों का साहित्य संकलन – बिश्वो शाहितो केंड्रो की अनूठी पहल

Bangladesh Literature: साहित्य समाज का वह सच होता हैं, जो लिखित सामग्री से हमें हमारे परिवेश से जुड़ी हर चीज को दिखाता है। इसलिए वर्षों बाद भी अच्छे साहित्यिक सामग्री हमें भाया करती है, हमें तनाव से आनंद की ओर ले जाती है, हमें भावों का रस देती है और सबसे बड़ी बात यह कि हमें समाज की मर्यादा बनाये रखने की प्रेरणा देती है। गलत और सही का अंतर करना सिखाती है। इससे गलतियां सुधारने में सहायता मिलती है।

बांग्लादेश में इसको लेकर एक बड़ा काम किया जा रहा है। वहां के बिश्वो शाहितो केंड्रो (Bishwo Shahitto Kendro) जिसे हिंदी में विश्व साहित्य केंद्र कहते हैं, ने पिछले 200 सालों में बांग्ला भाषा के अग्रणी साहित्यकारों की रचनाओं और लेखों का एक बड़ा संकलन प्रकाशित करने जा रहा है। केंद्र ने पढ़ने की आदतों को बढ़ावा देकर लोगों को जागरूक करने के अपने प्रयास के तहत पिछले 200 सालों के अग्रणी बांग्ला लेखकों की चयनित लेखन सामग्री का एक विशाल संकलन प्रकाशित करने की पहल की है।

Bangladesh Literature: क्या है बिश्वो शाहितो केंड्रो

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के प्रमुख स्थान काजी नजरूल इस्लाम एवेन्यू में 1978 में स्थापित बिश्वो शाहितो केंड्रो (संक्षिप्त में BSK) का मुख्य उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदतों को विकसित करना और पाठकों को अच्छे साहित्य उपलब्ध कराना है। इसकी स्थापना प्रसिद्ध लेखक, टेलीविजन प्रेजेंटर अब्दुल्ला अबू सईद (Abdullah Abu Sayeed) ने की थी। सईद को “बंगाल और दुनिया की महान पुस्तकों को सामने लाकर बांग्लादेश के युवाओं में साहित्य और उसके मानवीय मूल्यों के प्रति प्रेम पैदा करने” के लिए पत्रकारिता, साहित्य और रचनात्मक संचार कला में 97वां रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया था। इसका आदर्श वाक्य “हमें प्रबुद्ध मनुष्य चाहिए” है।

Bangladesh Literature: सिर्फ 200 सालों का ही साहित्यिक चयन क्यों

बिश्वो शाहितो केंड्रो के संस्थापक प्रोफेसर अब्दुल्ला अबू सईद के मुताबिक पिछले 200 साल बंगाली लोगों के जीवन में “सबसे बेहतरीन” अवधि रही है। इस अवधि में बंगाली साहित्य काफी फला-फुला और बंगाली लेखकों, रचनाकारों और बंगलाभाषी लोगों के जीवन में व्यापक सुधार आया है। बौद्धिक रूप से बंगाली समाज ने इस अवधि में काफी प्रगति की है। उनकी बौद्धिक चेतना काफी तेजी से विकसित हुई है। इन 200 सालों के पहले भी बांग्ला साहित्य और बंगालियों के कार्य उल्लेखनीय रहे हैं, लेकिन बाद के दो सौ साल कहीं ज्यादा उत्साहजनक रहे हैं।

Bangladesh Literature: 200 साल के पहले कैसा था बांग्लादेशी समाज

बांग्लादेश और बांग्ला संस्कृति वाला हिस्सा लंबे समय तक अंग्रेजी शासन के अधीन रहा। तब यह भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा था। आजादी मिलने के पहले तक यह दो हिस्सों- पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल में बंटा रहा। देश के विभाजन के बाद यह पाकिस्तान का हिस्सा रहा और बाद में साल 1971 में जब यह अलग हुआ तक तब एक आजाद देश के नाम पर बांग्लादेश बना। ढाका विश्वविद्यालय के बांग्ला विभाग के पूर्व शिक्षक प्रोफेसर अबुल काशेम फजलुल हक ने कहा कि मध्ययुगीन काल में, दुनिया के इस हिस्से पर उन लोगों का शासन था, जो बंगाली नहीं थे। हालांकि, उस समय भी एक भाषा के रूप में बांग्ला का विकास हुआ।

Bangladesh Literature: कैसी होगी संकलन की रूपरेखा

संकलन का नाम “बंगालीर चिंतामुलक रचना संग्रह” होगा। इसमें 208 खंड होंगे और कुल 74,000 पृष्ठ होंगे। 16 अलग-अलग विषय होंगे। पूरा संकलन कई किश्तों में उपलब्ध कराया जाएगा। मौजूदा दौर में इसमें से 54 खंड उपलब्ध है। इसमें इतिहास, दर्शन, महिलाओं के विषय, विज्ञान और संस्कृति जैसे पाठ्य सामग्री उपलब्ध है। संपूर्ण संकलन मार्च 2024 तक धीरे-धीरे पाठकों के लिए उपलब्ध होंगी।

किस विषय में कितने खंड होंगे

इतिहास (18 खंड), दर्शन (20 खंड), धर्म (20 खंड), कला (11 खंड), साहित्य (35 खंड), विज्ञान (आठ खंड), पर्यावरण (पांच खंड), फिल्म (10 खंड), संगीत (13 खंड), राजनीति (25 खंड), भाषा (10 खंड), संस्कृति (चार खंड), महिला मुद्दे (चार खंड), समाज (आठ खंड), अर्थशास्त्र (आठ खंड), और शिक्षा (नौ खंड)।

साहित्य संकलन के इस काम की पहल कब हुई

केंद्र के निदेशक शमीम अल मामुन के मुताबिक सन 2000 में उन्होंने इसको आरंभ करने की पहल शुरू की और अगले आठ सालों (2000-2008) तक लेखन सामग्री का संग्रह और चयन किया गया। यह एक बड़ा काम था और व्यवस्थित तरीके से करने में काफी मेहनत करनी पड़ी।

सभी खंड मिलाकर पूरे संकलन की कीमत क्या होगी

प्रोफेसर सईद के मुताबिक पूरे संकलन की वास्तविक कीमत 1.80 लाख बांग्लादेशी टका होगी। 30 प्रतिशत छूट के बाद यह पाठकों को 1.26 लाख बांग्लादेशी टका में मिलेगा। भारतीय रुपयों में इसकी कीमत करीब 95,000 (पंचानवे हजार) रुपये होगी। अगर कोई पाठक इसको प्री-ऑर्डर करता है तो उसे मार्च 2024 तक यह पूरा संकलन 90,000 बांग्लादेशी टका (भारतीय रुपयों में करीब 67,832 रुपये) में उपलब्ध कराया जाएगा। पाठक www.bcrs.bskbd.org वेबसाइट पर पूरी जानकारी ले सकते हैं।

बांग्ला साहित्य के बड़े नाम

बंकिमचंद्र चट्टोपध्याय, रवींद्रनाथ ठाकुर, शरत चंद्र चट्टोपाध्याय, गोर्विदचंद्रदास, देवेंद्रनाथ सेन, अक्षयकुमार बड़ाल, कामिनी राय, सुवर्णकुमारी देवी, अक्षयकुमार मैत्रेय, रामेद्रसुंदर त्रिवेदी, प्रभात कुमार मुखर्जी, द्विजेंद्रलाल राय जैसे लेखक, कवि, उपन्यासकारों ने बांग्ला साहित्य को भरपूर समृद्ध किया है।

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