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Corona से निपटने में SAARC निभा सकता है बड़ी भूमिका

वत्सल श्रीवास्तव

सार्क (SAARC) विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या वाला आर्थिक और राजनीतिक संगठन है। मालदीव को छोड़कर इस संगठन के सभी सदस्य भारतीय उपमहाद्वीप के हिस्सा हैं। संगठन बनाने का विचार सबसे पहले बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान ने दिया था। संगठन को सुचारू रूप से चलाने और विश्व बिरादरी में एक मजबूत संस्था के रूप में उभरने के लिए इसने अपना एक संविधान बनाया है। संविधान की कई धाराएं इसे आपसी समन्वय और भरोसे के साथ संगठन के सदस्य देशों के विकास और सामूहिक उन्नति में लगने पर जोर देती हैं।

सार्क संगठन का उद्देश्य जनकल्याण, लोगों के जीवनस्तर में सुधार, आपसी विश्वास, समस्याओं का मूल्यांकन, और सामान्य हितों के मामले में आपसी संबंध को सुधारना है। पूरा विश्व इस समय कोरोना वायरस की पीड़ा झेल रहा है। ऐसे में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर सार्क देशों ने COVID-19 को लेकर रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक मीटिंग की।

इसमें पीएम नरेंद्र मोदी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सालिह, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के अलावा अफगानिस्तान, श्रीलंका, भूटान के राष्ट्राध्यक्ष और पाकिस्तान के स्वास्थ्य संबंधी विशेष सहायक जफर मिर्जा मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क के सभी सदस्य देशों से बातचीत की और कोरोना जैसी महामारी का डटकर मुकाबला करने के लिए कहा। प्रधानमंत्री की बात का सार्क के सभी देशों ने स्वागत किया और वर्तमान समय में आपसी मनमुटाव खत्म कर एक दूसरे की मदद करने को जरूरी बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड 19 पर एक इमरजेंसी फंड बनाने की भी घोषणा की और अपनी ओर से उसमें एक करोड़ अमेरिकी डॉलर देने का ऐलान भी किया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत के विशेषज्ञ डॉक्टर स्वास्थ्य कर्मी और वैज्ञानिक सार्क देशों में कहीं पर भी जाने के लिए हमेशा तैयार हैं। बताया कि सार्क देशों में दुनिया की पूरी आबादी का पांचवां हिस्सा रहता है। ऐसे में यह मीटिंग बहुत ही जरूरी है। सार्क विकासशील देशों का समूह हैं। इनमें भारत सबसे मजबूत और सर्वाधिक जनसंख्या वाला राष्ट्र है।

ऐसे में इस मीटिंग से आपसी समस्याओं को हल करने, अर्थव्यवस्था में सुधार लाने, संसाधनों का साझा इस्तेमाल करने को बल देगा। उन्होंने कहा कि सभी देशों को यह समझना होगा कि आपसी सहयोग से ही हम भविष्य के लिए नए दरवाजे खोल सकेंगे।

यह मीटिंग कोरोना वायरस से निपटने के लिए आपस में रणनीति बनाने और समस्या के हल पर विचार के लिए बुलाई गई थी, लेकिन पाकिस्तान ने इसमें भी जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाकर विश्व समुदाय के सामने अपनी किरकिरी कराने से बाज नहीं आया।

पूरा विश्व अभी कोरोना वायरस की समस्या से चिंतित है, ऐसे में सम्मेलन में इस तरह के मुद्दे उठाकर पाकिस्तान ने अपनी अगम्भीरता को ही पेश किया। पाकिस्तान को समझना होगा कि ऐसा करके वह अपने लिए सहयोग के सभी दरवाजे खुद बंद कर ले रहा है ।

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