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Prerna Vimarsh 2025: देश कैसे बदला और आगे क्या? मंथन और दिशा

Prerna Vimarsh 2025: नोएडा में प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की ओर से हुए तीन दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ में दीप जलाते अतिथि।

Prerna Vimarsh 2025: तेजी से बदलते सामाजिक, वैचारिक और वैश्विक परिदृश्य में भारत के नवोत्थान की दिशा और उसकी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श शनिवार को नोएडा में देखने को मिला। सेक्टर-62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ के दूसरे दिन देश के प्रख्यात लेखकों, इतिहासकारों, कूटनीतिज्ञों, रक्षा विशेषज्ञों और विचारकों ने नवोत्थान के नए क्षितिजों पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर पिछले वर्ष के विमर्श पर आधारित पुस्तक ‘पंच परिवर्तन’ का विमोचन भी किया गया।

Prerna Vimarsh 2025: National Debate
Prerna Vimarsh 2025: नोएडा में प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में हुए तीन दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श–2025’ की झलकियां।

Prerna Vimarsh 2025: अब अयोध्या पर लिखना आसान

कार्यक्रम के पहले सत्र में ‘मंत्र विप्लव : वैचारिक क्षेत्र में नवोत्थान’ विषय पर राज्यसभा सांसद और विख्यात इतिहासकार मीनाक्षी जैन ने कहा कि बीते एक दशक में बौद्धिक और वैचारिक माहौल में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले अयोध्या जैसे विषयों पर लिखने में प्रकाशक दबाव में रहते थे और पुस्तकें छापने से कतराते थे, लेकिन पिछले दस वर्षों में परिस्थितियां बदली हैं और अब वही प्रकाशक ऐसे विषयों पर लेखन के लिए आग्रह करते हैं। इसे उन्होंने वैचारिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का संकेत बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने कहा कि दशकों तक चली सांस्कृतिक गुलामी से बाहर निकलने की प्रक्रिया में देश ने ठोस प्रगति की है और यह परिवर्तन भारत के नवोत्थान की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रतिबिंब शर्मा ने किया, जिन्होंने विचारों के क्षेत्र में तकनीक को चुनौती और अवसर दोनों के रूप में प्रस्तुत करते हुए संवाद को रोचक बनाया।

दूसरे सत्र में Prerna Vimarsh 2025: ‘वसुधैव कुटुंबकम : वैश्विक क्षेत्र में नवोत्थान’ विषय पर पूर्व राजदूत सुशील कुमार सिंघल ने कहा कि जब तक भारत अपनी सभ्यता और मूल सिद्धांतों को आत्मसात कर विदेश नीति, अनुसंधान और आर्थिक रणनीतियां तय नहीं करेगा, तब तक औपनिवेशिक सोच से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकेगा। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की सार्वभौमिकता को मजबूत करने के लिए स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार नरेश कुमार कुमावत ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीते वर्षों में सनातन परंपरा और सांस्कृतिक प्रतीकों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। विदेशों में भी भारतीय सांस्कृतिक चेतना के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता उन्होंने एक सकारात्मक बदलाव के रूप में रेखांकित की। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा ने किया।

तीसरे सत्र में Prerna Vimarsh 2025: ‘शस्त्रेण रक्षति राष्ट्रे : रक्षा क्षेत्र में नवोत्थान’ पर चर्चा हुई। सेवानिवृत्त मेजर जनरल विजय शरद रानाडे ने कहा कि युद्ध की प्रकृति बदल चुकी है और भारत की सैन्य सोच भी रक्षात्मक से आक्रामक रणनीति की ओर बढ़ी है। उन्होंने बालाकोट, उरी और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब ड्रोन, मिसाइल और छद्म युद्ध नई वास्तविकता हैं।

रक्षा विशेषज्ञ राजीव नयन ने कहा कि भारत को सामरिक दृष्टि से शस्त्र के साथ-साथ शास्त्र यानी बुद्धिमत्ता का भी उपयोग करना होगा। स्वदेशी तकनीक, रणनीतिक संयम और बिना युद्ध के शक्ति का एहसास कराना आज की आवश्यकता है। इस सत्र का संचालन नेटवर्क-18 के प्रबंध संपादक आनंद नरसिम्हन ने किया, जिन्होंने ‘शत्रु बोध के साथ स्वयं बोध’ की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रेरणा सम्मान–2025 टाइम्स नाउ की ग्रुप एडिटर-इन-चीफ नविका कुमार को प्रदान किया गया। हर सत्र के अंत में वक्ताओं ने श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देकर संवाद को और गहराई दी।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू, प्रेरणा विमर्श–2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय, सह-संयोजक अखिलेश चौधरी, एनआईओएस के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा, सचिव मोनिका चौहान सहित देशभर से आए 300 से अधिक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका और डॉ. नीलम कुमारी ने किया।

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