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Valentine Day पर “Digital Love बनाम Real Love”: डॉ. बीरबल झा का भावनात्मक संदेश — प्रेम को समझने की नई दृष्टि

Digital Love vs Real Love: वैलेंटाइन डे पर British Lingua पटना में बोलते हुए डॉ. बीरबल झा।

Digital Love vs Real Love: British Lingua के मैनेजिंग डायरेक्टर Dr. Birbal Jha ने Valentine Day के अवसर पर संस्थान परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित किया। कार्यक्रम का विषय था — “डिजिटल लव बनाम रियल लव।” छात्रों, शिक्षकों और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में डॉ. झा ने प्रेम को मानवता की सबसे सार्वभौमिक भाषा बताते हुए कहा, “दुनिया में हजारों भाषाएं और अनगिनत बोलियां हैं, लेकिन प्रेम ही एक ऐसी भाषा है जिसे अनुवाद की आवश्यकता नहीं होती। इसे कानों से नहीं, हृदय से समझा जाता है।”

उन्होंने कहा कि राष्ट्र सीमाओं से, संस्कृतियां परंपराओं से और व्यक्ति अपने विचारों से अलग हो सकते हैं, किंतु प्रेम हर विभाजन को पार कर जाता है।

Digital Love vs Real Love: शब्दों से परे प्रेम की अभिव्यक्ति

डॉ. झा ने कहा कि प्रेम शब्दों, व्याकरण और वाक्य संरचना से परे संवाद करता है। “मां का स्पर्श, शिक्षक का उत्साहवर्धन, मित्र का मौन समर्थन—ये सभी बिना किसी शब्द के भी पूरी स्पष्टता से समझे जाते हैं।” उन्होंने कहा कि जब शब्द असफल हो जाते हैं, तब प्रेम मौन, संकेतों और स्नेहपूर्ण उपस्थिति के माध्यम से बोलता है।

Digital Love vs Real Love: डिजिटल लव त्वरित लेकिन सतही

डिजिटल लव की परिभाषा देते हुए डॉ. झा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में संवाद तो त्वरित हो गया है, परंतु उसकी गहराई अक्सर कम हो गई है। “संदेश टाइप किए जाते हैं, इमोजी भेजे जाते हैं और भावनाएं सार्वजनिक रूप से साझा की जाती हैं, किंतु सच्चे संबंधों की गहराई कहीं-कहीं खो जाती है।”

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रेम कई बार अभिव्यक्ति से अधिक प्रदर्शन बन जाता है। “डिजिटल लव प्रायः सराहना पाने के लिए सजाया जाता है, जबकि सच्चा प्रेम आत्मीयता में पनपता है।” हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तकनीक दूरियों को कम करने में सहायक है, परंतु यह भावनात्मक गहराई का विकल्प नहीं हो सकती।

Digital Love vs Real Love: रियल लव अभ्यास, न कि प्रदर्शन

रियल लव की चर्चा करते हुए डॉ. झा ने कहा, “सच्चा प्रेम केवल व्यक्त नहीं किया जाता, बल्कि धैर्य, सम्मान और जिम्मेदारी के साथ अभ्यास किया जाता है।” भाषा और जीवन के बीच समानता स्थापित करते हुए उन्होंने कहा, “प्रेम का व्याकरण सरल है—सत्यनिष्ठा उसका कर्ता है, विश्वास उसकी क्रिया है और प्रतिबद्धता उसका कर्म है।” यदि सत्यनिष्ठा नहीं होगी तो स्नेह खोखला हो जाएगा; यदि विश्वास टूटेगा तो संबंध बिखर जाएंगे; और यदि प्रतिबद्धता नहीं होगी तो प्रेम दिशाहीन हो जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रेम भव्य घोषणाओं से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे निरंतर प्रयासों से जीवित रहता है। “प्रेम की शब्दावली बड़े वादों से नहीं, बल्कि नियमित देखभाल के छोटे-छोटे कार्यों से समृद्ध होती है।”

Meaning of True Love: प्रेम एक सजग निर्णय

डॉ. झा ने कहा, “प्रेम क्षणिक भावना नहीं, बल्कि प्रतिदिन लिया जाने वाला एक सजग निर्णय है।” उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे अहंकार की जगह सहानुभूति, क्रोध की जगह समझ और द्वेष की जगह क्षमा को चुनें। उन्होंने यह भी कहा, “प्रेम सुनाई देने के लिए चिल्लाता नहीं, बल्कि महसूस किए जाने के लिए फुसफुसाता है।”

Love in Digital Age: प्रेम में दक्षता ही जीवन की सर्वोच्च दक्षता

अपने संबोधन के समापन पर डॉ. झा ने कहा कि अनेक भाषाओं में दक्षता करियर को समृद्ध करती है, परंतु प्रेम में दक्षता चरित्र को महान बनाती है। “जीवन की सर्वोच्च दक्षता प्रेम में दक्षता है, जहां करुणा ही संवाद बन जाती है।” उन्होंने छात्रों-शिक्षकों का आह्वान किया कि वे इस महान भाषा को अपने घर, कक्षा, कार्यस्थल और समाज में विकसित करें, ताकि व्यक्तिगत सुख के साथ-साथ सामूहिक शांति की स्थापना हो सके।

Dr Birbal Jha: छात्रों से संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र

कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने डिजिटल युग में संबंधों की प्रामाणिकता पर अपने विचार साझा किए।

 

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