डेल्टा प्लस: शक्तिशाली देशों का भी ‘पॉवर’ कमजोर

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कोरोना का विषाणु जब से आया है तब से मुसीबत ही बना हुआ है। दुनिया के शक्तिशाली और विकसित माने जाने वाले देश भी इस विषाणु का सामना करने और इससे लड़ने में खुद को अक्षम पा रहे हैं। इससे यह गंभीर होता जा रहा है। हालांकि टीकों के बनने और दुनिया के करोड़ों लोगों को टीका लग चुकने के बाद इससे निजात की उम्मीद की जा रही है, लेकिन अब भी इसका पूरी तरह खात्मा नहीं हो सका है। उलटा इसका अगला स्वरूप डेल्टा प्लस भी पनप रहा है। भारत के कुल 13 राज्यों में अब तक कुल पचास से ज्यादा केस आ चुके हैं। हाल ही में इसकी पता लगा है।

टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के कोविड-19 कार्य समूह (एनटीएजीआई) के प्रमुख डॉ. एनके अरोड़ा के मुताबिक विषाणु के अन्य स्वरूपों की तुलना में ‘डेल्टा प्लस’ स्वरूप का फेफड़ों के उत्तकों से ज्यादा जुड़ाव मिला है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि इससे गंभीर बीमारी होगी या यह ज्यादा संक्रामक है। फिर भी सरकार ने इसे ‘चिंताजनक स्वरूप’ के तौर पर वर्गीकरण किया गया। इस स्वरूप से संक्रमण के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से आए हैं।

अरोड़ा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “उन्होंने कहा कि अन्य स्वरूपों की तुलना में फेफड़ों से इसका ज्यादा जुड़ाव है लेकिन स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं है कि डेल्टा प्लस गंभीर बीमारी का कारक होगा या यह ज्यादा संक्रामक है।

उन्होंने कहा कि कुछ और मामलों की पहचान के बाद डेल्टा प्लस के असर के बारे में तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी, लेकिन ऐसा लगता है कि टीके की एक या दोनों खुराक ले चुके लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण दिखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमें इसके प्रसार पर बहुत करीबी नजर रखनी होगी ताकि हमें इससे फैलने वाले संक्रमण का पता चले।’’
अरोड़ा ने कहा कि डेल्टा प्लस स्वरूप के जितने मामलों की पहचान हुई है उससे ज्यादा मामले हो सकते हैं क्योंकि ऐसे कई लोग हो सकते हैं जिनमें संक्रमण का कोई लक्षण नहीं हो और वे संक्रमण का प्रसार कर रहे हों।

उन्होंने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण चीज यह है कि जीनोम अनुक्रमण का काम तेज हुआ है और यह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्यों को पहले ही बता दिया गया है कि यह चिंताजनक स्वरूप है और इसके लिए कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे कई राज्यों ने पहले से ही उन जिलों के लिए सूक्ष्म स्तर पर योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं जहां वायरस की पहचान की गई है ताकि उनके प्रसार को नियंत्रित किया जा सके। निश्चित रूप से इन जिलों में टीकाकरण बढ़ाना होगा।”

cmarg author

Sanjay Dubey is Graduated from the University of Allahabad and Post Graduated from SHUATS in Mass Communication. He has served long in Print as well as Digital Media. He is a Researcher, Academician, and very passionate about Content and Features Writing on National, International, and Social Issues. Currently, he is working as a Digital Journalist in Jansatta.com (The Indian Express Group) at Noida in India. Sanjay is the Director of the Center for Media Analysis and Research Group (CMARG) and also a Convenor for the Apni Lekhan Mandali.

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