Covid-19, corona virus, corruption
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देश में लोकतंत्र है, लेकिन जनसेवकों के लिए

जब जुल्म की इंतेहा होती है तो परिणाम निर्णायक असर दिखाते हैं। देश में कुछ ऐसा ही हाल है। एक तरफ लोग कोविड-19 की दूसरी लहर में तेजी से जान गंवा रहे हैं, उन्हें न तो ऑक्सीजन मिल रही है, न ही बेड मिल रहे हैं। डॉक्टर तो दूर अस्पताल के अंदर भी प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। स्थिति बहुत विकट है। लोग अपने हाथ में अपनी जान लेकर घूम रहे हैं। भरोसा सिर्फ भगवान पर है। इंसानी व्यवस्था में जो लोग पॉवर रखते हैं, वे कुछ-कुछ नामर्द जैसे हो गए हैं। मरते इंसान को देखकर भी वे कहते हैं कि सब कुछ ठीक है। वे बताना यह चाह रहे हैं कि अगर कुछ दिक्कतें हैं भी तो यह हमारी गलती नहीं, अगले की गलती है। ऐसी व्यवस्था और ऐसी सोच रखने वाले गिरे हुए लोगों पर लानत है।

पिछली बार जब देश में कोरोना महामारी फैली थी, सरकार ने लोगों से कहा कि वे सरकार के खाते में आर्थिक मदद करें, जिससे आम जनता को राहत प्रदान किया जा सके। देश में जो लोग बेरोजगार हैं, बेहाल हैं, मध्यमवर्गीय समाज में भी जिनको सामान्य जीवन जीना भी मुनासिब नहीं हो रहा है, उनसे सरकार आर्थिक मदद मांग रही है। और देश के राजनेताओं के पास दुनिया की सारी सुख-सुविधाएं मुहैया हैं, बिना कोई उद्योग चलाए, वे करोड़पति-अरबपति हैं। जो रहते हैं राजाओं-महाराजाओं की तरह, जिनके पास कई-कई आलीशान बंगले हैं, सरकारी नौकर-चाकर हैं, लक्जरी गाड़ियां मुहैया हैं और जनता के ही पैसे से उनको लाखों रुपए प्रतिदिन के खर्च पर सरकारी सुरक्षा मिली हुई है, वे अपनी दमड़ी से फूटी कौड़ी भी नहीं दे रहे हैं।

इससे तो अच्छा था कि देश में कोई तानाशाह आ जाए। ऐसे लोकतंत्र से दुनिया आजिज आ गई है। राजनेता खुद को जनसेवक बताते हैं, लेकिन वे रहते हैं आसमान पर और जनता, जो उनकी मालिक है, वह सड़क पर रहती है। यह लोकतंत्र शब्द का अपमान है और घिनौना लगता है। यह लोकतंत्र केवल राजनेताओं के लिए है।

एक तरफ सरकार कह रही है कि देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है, दूसरी तरफ लोग ऑक्सीजन के लिए मर रहे हैं। क्या यह ऑक्सीजन प्रधानमंत्री आवास में रखी है, या यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर रखी है या फिर केंद्रीय और यूपी के स्वास्थ्य मंत्रियों के आवासों पर रखी है। विपक्षी पार्टियां जिन्हें विपक्ष कहना भी विपक्ष शब्द की लानत-मलानत करने जैसा है। उनका रिकॉर्ड भी भ्रष्टाचार में इतना डूबी है कि वे भ्रष्ट लोग रिश्वत लेकर भी रिकॉर्ड को साफ नहीं कर सकते हैंं।

cmarg author

Sanjay Dubey is Graduated from the University of Allahabad and Post Graduated from SHUATS in Mass Communication. He has served long in Print as well as Digital Media. He is a Researcher, Academician, and very passionate about Content and Features Writing on National, International, and Social Issues. Currently, he is working as a Digital Journalist in Jansatta.com (The Indian Express Group) at Noida in India. Sanjay is the Director of the Center for Media Analysis and Research Group (CMARG) and also a Convenor for the Apni Lekhan Mandali.

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