Afghanistan and India
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बड़ा सवाल: अफगानिस्तान का होगा तालीबानीकरण!

ज्यों-ज्यों अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना के जाने का समय नजदीक आता जा रहा है, त्यों-त्यों भारत के नीति नियंता इस बात पर मंथन करने को विवश हो रहे हैं कि अब वहां से हमारा संबंध कैसा रहेगा। अभी जो सरकार वहां कायम है, वह रहेगी कि नहीं, और रहेगी भी तो तालिबान का राजनीतिक पकड़ किस हद तक होगी। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी फौज के जाने के बाद अफगानिस्तान में फिर से तालिबान की पकड़ मजबूत होगी। खबर है कि कई शहरों में तालिबान का कब्जा भी हो गया है। इसको लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही है।

इन सबके अलावा जिस बात की ज्यादा चर्चा है वह है तालिबान के साथ भारत की बातचीत, जो पहले असंभव मानी जा रही थी। बताया जा रहा है कि अभी हाल ही में तीसरे देश में भारत सरकार के प्रतिनिधि ने तालिबान के प्रतिनिधियों से बातचीत की है। आधिकारिक तौर पर भारत की तालिबान नेताओं से अंतिम बातचीत 1999 में एयर इंडिया के विमान को हाईजैक करके कंधार ले जाए जाने के वक्त हुई थी, उस वक्त विमान और यात्रियों को सुरक्षित छुड़वाने के लिए भारत को विवश होकर तालिबानियों से बातचीत करनी पड़ी थी।

तब से अब तक भारत और तालिबान के बीच ऐसी कोई आधिकारिक मुलाकात और बैठक की सूचना नहीं है। हाल ही में किसी तीसरे देश में तालिबान प्रतिनिधियों के साथ भारत के प्रतिनिधियों की बातचीत किए जाने की चर्चाएं जरूर उठी हैं।

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मूल सवाल यह है कि जब अमेरिकी फौज अफगानिस्तान की सरजमीं से रुखसत हो जाएगी तब वहां के हालात क्या होंगे। क्या मौजूदा सरकार कायम रहेगी, या तालिबान का कब्जा बढ़ेगा या फिर तालिबान पूरी तरह से अफगानिस्तान की सत्ता हथिया लेगा। भारत हमेशा से अफगानिस्तान की सरकार को मान्यता देता रहा है। भारत की नजर में तालिबान एक आतंकी गुट है, जिसे किसी भी हालत में भारत शासक का दर्जा नहीं देना चाहेगा और न ही उससे संपर्क रखना चाहेगा।

एक सवाल और है जो बहुत महत्वपूर्ण है, वह है वहां की जमीनी हालात को सुधारने में भारत ने अरबों डॉलर रुपए लगाए हैं। अफगानिस्तान के विकास में भारत का महत्वपूर्ण योगदान है, लेकिन यह योगदान वहां की सरकार के नेतृत्व में मुल्क की जनता की बेहतरी के लिहाज से किया गया है। अब अगर वहां पर तालिबान का कब्जा बढ़ता है तो यह न तो अफगानिस्तान के हित में होगा और न ही भारत के लिए अच्छा होगा। इससे भारत को चिंतित होना लाजिमी है।

cmarg author

Sanjay Dubey is Graduated from the University of Allahabad and Post Graduated from SHUATS in Mass Communication. He has served long in Print as well as Digital Media. He is a Researcher, Academician, and very passionate about Content and Features Writing on National, International, and Social Issues. Currently, he is working as a Digital Journalist in Jansatta.com (The Indian Express Group) at Noida in India. Sanjay is the Director of the Center for Media Analysis and Research Group (CMARG) and also a Convenor for the Apni Lekhan Mandali.

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