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जरा सा नशा करा दे… यानी अंधेरी गली में मौत से मोहब्बत की जिद

शराब के नशे में डूबा युवा एक बार इसमें फंसने के बाद और देने की मांग करता है। (Photo- The Economic Times)

हाल ही में यूपी के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा के तूतीबाड़ी थाना क्षेत्र में बुधवार को जमुई कला गांव के एक गोदाम से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त छापेमारी में करीब 686 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित नशीली दवाएं बरामद की गईं। इससे पहले पंजाब पुलिस ने लुधियाना और अंबाला से करोड़ों रुपये की नशीली दवाएं पकड़ी थीं। यह पिछले कुछ दिनों की खबरें हैं। लेकिन इसका सिलसिला पीछे से आगे तक काफी लंबा है।

नशीले पदार्थ लोगों की जिंदगी में मौत से मोहब्बत के मानिंद घुल रहे हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है। इसके चलते हर साल लाखों लोग अपनी जिंदगी को खाक कर रहे हैं तो उससे भी ज्यादा वे लोग बर्बाद हो रहे हैं, जो इनके परिवार में हैं। अंतरराष्ट्रीय डाटा के मुताबिक करीब आठ लाख लोग हर साल अवैध तरीके से नशीले पदार्थों के सेवन से अपनी जिंदगी गंवा देते हैं।

यूएनओडीसी की 2021 वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में दुनिया भर में लगभग 275 मिलियन लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया। 36 मिलियन से अधिक लोग नशीली दवाओं के उपयोग संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे। कोविड महामारी के दौरान बहुत से देशों में भांग का सेवन आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ गया। इस दौरान दवाओं का गैरचिकित्सकीय उपयोग भी खूब बढ़ा है। यानी लोग उसको नशे के रूप में सेवन किए। दुनियाभर में 2020 में 15 से 64 वर्ष की आयु के करीब 5.5 फीसदी लोगों ने कम से कम एक बार नशीली दवाओं का सेवन जरूर किया है।

36.3 मिलियन लोग (नशीले पदार्थों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या का 13 प्रतिशत) नशीली दवाओं के दुरुपयोग से जुड़े विकारों से पीड़ित हैं। अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर 11 मिलियन से अधिक लोग दवाओं का इंजेक्शन लगाते हैं – उनमें से आधे को हेपेटाइटिस सी है।

भारत में भी इसका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। यूपी, पंजाब, कर्नाटक समेत कई राज्यों में ड्रग माफिया का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से युवाओं में यह लत गंभीर होती जा रही है। सिर्फ पंजाब का हाल यह है कि अमूमन हर चौथा या पांचवा युवा नशे की लत का शिकार है। दूसरी तरफ गरीब और निचले वर्ग के लोग अशिक्षा, बेरोजगारी, लालच और जिंदगी की दुश्वारियों की वजह से नशे की लत के शिकार बन रहे हैं।

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दुर्भाग्य से इसको रोकने के प्रति सरकारी और निजी स्तर पर जितना प्रयास किया जा रहा है, उसके फायदे कम नुकसान ज्यादा हो रहे हैं। कई सरकारों ने अपने राज्यों में शराबबंदी का नियम लागू किया है, लेकिन दूसरे राज्य भारी राजस्व की आमद होने से इसको बढ़ावा दे रहे हैं। जहां यह प्रतिबंधित है, वहां पर चोरी छिपे और तस्करी के माध्यम से यह पहुंच रही है। फिर बॉलीवुड से लेकर सियासी जगत तक में इसको बढ़ावा देने के लगातार सूचनाएं मिलती रहती हैं। देश के हर तरह चुनावों में मतदाताओं को लुभाने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है।

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