National

तनातनी में किसान और सरकार, दोनों पक्ष बोले- न झुकेंगे, न हटेंगे

हरियाणा के करनाल में सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा के महापंचायत में जुटे किसान। (फोटो- पीटीआई)

पिछले कई महीनों से आंदोलन कर रहे किसानों का विवाद और उनकी मांगों को लेकर संकट का कोई हल नहीं निकल पा रहा है। मामला दोनों तरफ से अटका हुआ है। न तो सरकार उनकी मांगें पूरी तरह से मानने की स्थिति में है और न ही किसान पीछे हटने की स्थिति में हैं। इस तनातनी में कई महीने निकल गए। बहुत जल्दी इस आंदोलन का एक साल पूरा होने वाला है। इससे हालात बिगड़ ही रहे हैं। इस बीच हरियाणा के करनाल में किसानों पर लाठी चार्ज और गिरफ्तारी को लेकर गुस्सा और बढ़ गया है।

सोमवार को किसानों ने महापंचायत करके मांग की कि करनाल में लाठीचार्ज में शामिल अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने 6 सितंबर तक की समयसीमा तय की है। कहा कि मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे सात सितंबर को सचिवालय की घेराबंदी करेंगे। इसके लिए पूरी तरह से सरकार ही जिम्मेदार होगी। उनका कहना है कि किसान किसी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे।

भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने करनाल में प्रदर्शनकारी किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो सात सितंबर को सचिवालय कार्यालय की घेराबंदी की जाएगी। उनका कहना है कि सरकार ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बल प्रयोग किया है। लोकतंत्र में हर किसी को शांति से अपनी आवाज उठाने का हक है। सरकार किसानों पर अत्याचार कर रही है।

चढूनी ने करनाल में शनिवार को कथित तौर पर लाठीचार्ज की वजह से जान गंवाने वाले किसान के परिजनों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग भी की। उन्होंने घायल हुए किसानों को भी दो-दो लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। लाठीचार्ज में कथित तौर पर शामिल अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग करते हुए चढूनी ने कहा कि लाठीचार्ज में हमारे भाई घायल हुए। एक भाई की मौत हो गई। इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए, चाहे वह एसडीएम हों या पुलिस अधिकारी।

READ: विषाणु से किसान तक राजनीति की गुंजाइश और उम्मीद

READ ALSO: संकट में कांग्रेस, पंजाब के बाद छत्तीसगढ़ में बदलाव की मांग

चढूनी ने रविवार को आरोप लगाया था कि एक किसान की मौत लाठीचार्ज की वजह से हुई, लेकिन पुलिस महानिरीक्षक ने आरोप से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि किसान की मौत उसके घर में हुई। उधर, किसानों का सिर फोड़ने वाले की बात कहने वाले अफसर का भी सरकार बचाव कर रही है। सरकार का अभी तक ये मानना है कि एसडीएम के शब्द गलत थे पर भावना नहीं।

ध्यान रहे कि भाजपा की बैठक के विरोध में करनाल की तरफ बढ़ते समय शनिवार को राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को बाधित कर रहे किसानों के एक समूह पर किए गए लाठीचार्ज में कथित तौर पर लगभग 10 किसान घायल हो गए थे। उसके बाद से ही किसान आक्रोशित हैं। पहले जहां नेशनल हाइवे पर जाम लगा विरोध जताया गया। सोमवार को करनाल में किसान महापंचायत के जरिए सरकार को चेतावनी दी गई।

The Center for Media Analysis and Research Group (CMARG) is a center aimed at conducting in-depth studies and research on socio-political, national-international, environmental issues. It provides readers with in-depth knowledge of burning issues and encourages them to think deeply about them. On this platform, we will also give opportunities to the budding, bright and talented students to research and explore new avenues.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *