ऐसे थे शास्त्री जी, पैसे न होने पर उफनाई गंगा को तैरकर किया पार

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री। (PHOTO Source: The Hindu)

भारत के महान नेताओं और सच्चे देशभक्त, अति ईमानदार, सादगी के प्रतिमूर्ति पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी का आज 2 अक्टूबर को 117वीं जयंती है। वैसे तो अनेक ऐसे वाकये हैं, जिससे हंसमुख स्वभाव वाले शास्त्रीजी की सादगी के अलावा विनम्रता, कर्मठता, सरलता, नियमबद्धता, दृढ़निश्चयता वगैरह स्पष्ट झलकती है। आज उनको नमन करते हुए आप सभी के साथ मैं यहां उनके बचपन के समय का एक ऐसा वाकया संक्षेप में साझा कर रहा हूं, जिससे उनकी कर्मठता के साथ साथ नियमबद्धता, दृढ़निश्चयता स्पष्ट परिलक्षित होती है।

शास्त्रीजी जब केवल डेढ़ वर्ष के ही थे, तभी उनके पिताजी, जो एक स्कूल शिक्षक थे, का निधन हो गया था। इसलिये परिवार को काफी गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक बार उन्‍हें बनारस से गंगा पार कर अपने घर रामनगर लौटना था, लेकिन उनके पास  किराए के पैसे नहीं थे। ऊपर से अंधेरा भी हो चला था। परिवार के नियमानुसार रात्रि के पहले ही घर पहुंचना जरूरी था। इसलिए उस किशोर उम्र में कर्मठ व दृढ़निश्चयी शास्त्रीजी तैरकर ही घर पहुंचने का निश्‍चय किए।

हालांकि उस समय गंगा नदी भी पूरे उफान पर थी फिर भी उन्होंने असीम साहस का परिचय देते हुये गंगा में छलांग लगा दी और गंगा तैरकर पार कर अपने गांव पहुंच गए। उन्हें देखकर नाव से पार जा रहे लोग आश्‍चर्यचकित रह गए। वे लोग उनके साहस की प्रशंसा करते हुये एक दूसरे को दिखाते हुए कह रहे थे – इस लड़के को देखो….अकेले ही तैर रहा है।

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तीस से अधिक वर्षों तक अपनी समर्पित सेवा के दौरान शास्त्री जी ने ऐसे अनेक साहसिक और बुद्धिमत्तापूर्ण कदम उठाए हैं जिसके चलते वे एक ऐसे राजनेता बनकर उभरे, जिन्होंने लोगों की भावनाओं को समझा। जबर्दस्त आंतरिक शक्ति वाले शास्त्री जी लोगों के बीच ऐसे दूरदर्शी थे, जो देश को प्रगति के मार्ग पर लेकर आए। इन्हीं सभी कारणों के कारण हम सभी मानते हैं लाल बहादुर शास्त्रीजी हमारी भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठ पहचान हैं।

उनकी विनम्रता, दृढता, सहिष्णुता, सादगी, देशभक्ति एवं ईमानदारी के साथ साथ अंतिम दम तक निःस्वार्थ भाव से की गई राष्ट्रसेवा के चलते उन्हें मरणोपरान्त भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

गोवर्धन दास बिन्नाणी “राजा बाबू”
बीकानेर
7976870397

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