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जानिए कितना अलग है पीएमएनआरएफ (PMNRF) से पीएमकेयर्स (PMCARES)

Photo Source: ABC News

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Contributor: Vatsal Srivastava

28 मार्च 2020 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना (corona) से बने हालात से लड़ने के लिए पीएमकेयर्स (PMCARES) यानी पीएम सिटिजन असिस्टेंस ऐंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस (आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष) फंड की शुरुआत की। भारत के प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों और काॅरपोरेट घरानों से इस फंड में दान करने की अपील की, जिससे देश वर्तमान समय में पैदा हुई स्थिति से उबर सके।

पीएमकेयर्स (PMCARES) फंड बनने के बाद से ही विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पूछा कि पीएमएनआरएफ (PMNRF) के होते हुए पीएमकेयर्स (PMCARES) की जरूरत क्यों पड़ी। आइए जानते हैं कि पीएमकेयर्स (PMCARES) और पीएमएनआरएफ (PMNRF) होते क्या है।

पीएमएनआरएफ (PMNRF) का पूरा नाम Prime Minister National Relief Fund यानी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष होता है। इसकी स्थापना आजादी से पूर्व 1948 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कर दी थी। पीएमएनआरएफ (PMNRF) की स्थापना तब पाकिस्तान से विस्थापित हुए लोगों की मदद करने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में इस राहत कोष का उपयोग बड़ा व्यापक हो गया था। उसके बाद से हर आपदा की स्थिति में और सामान्य समय में भी आम लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इससे मदद की जाती है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के संचालन का अधिकार पूरी तरह पीएमओ को प्राप्त है, 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसका संचालन पूरी तरह पीएमओ पर कर दिया था। पीएमएनआरएफ (PMNRF) में दान करने पर आयकर की धारा 80 जी के तहत छूट मिलती है। जब नेहरू ने 1948 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की स्थापना की थी तब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी फंड की प्रबंध समिति में होते थे। 1985 से पहले कारपोरेट घरानों के प्रतिनिधियों को भी इसमें जगह मिलती थी, मगर राजीव गांधी ने बाद में सिर्फ और सिर्फ पीएमओ (PMO)के अधीन इसका संचालन कर दिया था।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की ऑडिट का अधिकार सीएजी (Comptroller and Auditor General of India) को है और खास बात यह है कि प्रधानमंत्री राहत कोष में हम न्यूनतम ₹100 का ही दान कर सकते हैं। पीएमकेयर्स (PMCARES) का पूरा नाम पीएम सिटिजन असिस्टेंस ऐंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ने के लिए 28 मार्च को इस फंड की शुरुआत की थी। पीएमकेयर्स (PMCARES) का संचालन प्रधानमंत्री करेगा और साथ ही साथ गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री भी अहम भूमिका में रहेंगे।

इसके अलावा विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून, समाजसेवा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को भी सदस्य के तौर पर नामित किया जाएंगे। फंड में जो रुपए मिलेंगे उसको कहां खर्च करना है, कैसे खर्च करना है, इसके बारे में प्रधानमंत्री, मंत्री और कुछ विशेष कमेटी मेंबर ही फैसला लेंगे। कई जानकारों का मानना है कि कि पीएमकेयर्स (PMCARES) का संचालन ज्यादा लोकतांत्रिक तरीके से होगा और इसकी पारदर्शिता पीएमएनआरएफ (PMNRF) से ज्यादा होगी। पीएमकेयर्स (PMCARES) में भी दान करने पर 80 जी के तहत छूट मिलती है।

पीएमकेयर्स (PMCARES) के संदर्भ में एक बात और कही जा सकती है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में सांसदों के एमपीलैड फंड से पैसा नहीं दिया जा सकता है। अगर एमपीलैड फंड का पैसा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में डाले जाने की व्यवस्था बना दी जाती तो इसे किसी भी आपदा में राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था, जोकि सही नहीं होता। पीएमकेयर्स (PMCARES) को ऑडिट कौन करेगा अभी इसके बारे में बात स्पष्ट नहीं है।

पीएमकेयर्स (PMCARES) में हम न्यूनतम ₹10 का दान भी दे सकते हैं। यानी एक बच्चा भी अपनी बचत से सहयोग कर सकता है, जबकि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में 100 रुपए से कम दान नहीं किया जा सकता है।

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